केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में हाल की आतंकी घटनाओं पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। आतंकी संगठनों द्वारा घाटी में प्रशिक्षण कैम्प चलाने और पीओके में आतंकी संगठनों की बैठक संबंधी इनपुट के बाद गृह मंत्रालय ने रियासत सरकार को चेताया है। इनपुट के मुताबिक पीओके में लश्करे तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन की संयुक्त बैठक में किसी बड़े हमले की साजिश रची गई है। उड़ी में पाकिस्तानी सेना द्वारा सीजफायर के उल्लंघन की घटना को आतंकी घुसपैठ की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने बीएसएफ, सीआरपीएफ और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने भी सेना कमांडरों से विस्तृत जानकारी ली है। गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर के हालात की समीक्षा की है। समीक्षा में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि आतंकी संगठन घाटी में फिर से 1990 के दशक की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके तहत बड़ी संख्या में कश्मीरी युवकों की आतंकी संगठनों में भर्ती की गई है। पुलवामा के पास आतंकी प्रशिक्षण कैम्प के इनपुट के बाद सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने गश्त बढ़ा दी है।
गृह राज्यमंत्री हरि भाई परथी भाई चौधरी ने कहा है कि वर्तमान में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि आतंकवादी देश के भीतर प्रशिक्षण कैम्प चला रहे हैं या कैम्प स्थापित करने की कोशिश हो रही है। लेकिन बम विस्फोट के मामलों की जांच के क्रम में यह तथ्य सामने आया है कि आतंकी संगठनों ने कुछ आतंकियों को शारीरिक प्रशिक्षण और आईईडी संबंधी प्रशिक्षण दिया था।