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गृह मंत्रालय ने आतंकी हमले के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार को चेताया

Wed, 18 May 2016 02:13 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • पाकिस्तानी साजिश पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
  • गृह मंत्रालय ने आतंकी हमले की आशंका के प्रति चेताया
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terrorist - फोटो : FILE
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में हाल की आतंकी घटनाओं पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। आतंकी संगठनों द्वारा घाटी में प्रशिक्षण कैम्प चलाने और पीओके में आतंकी संगठनों की बैठक संबंधी इनपुट के बाद गृह मंत्रालय ने रियासत सरकार को चेताया है। इनपुट के मुताबिक पीओके में लश्करे तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन की संयुक्त बैठक में किसी बड़े हमले की साजिश रची गई है। उड़ी में पाकिस्तानी सेना द्वारा सीजफायर के उल्लंघन की घटना को आतंकी घुसपैठ की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने बीएसएफ, सीआरपीएफ और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने भी सेना कमांडरों से विस्तृत जानकारी ली है। गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर के हालात की समीक्षा की है। समीक्षा में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि आतंकी संगठन घाटी में फिर से 1990 के दशक की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके तहत बड़ी संख्या में कश्मीरी युवकों की आतंकी संगठनों में भर्ती की गई है। पुलवामा के पास आतंकी प्रशिक्षण कैम्प के इनपुट के बाद सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने गश्त बढ़ा दी है।

गृह राज्यमंत्री हरि भाई परथी भाई चौधरी ने कहा है कि वर्तमान में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि आतंकवादी देश के भीतर प्रशिक्षण कैम्प चला रहे हैं या कैम्प स्थापित करने की कोशिश हो रही है। लेकिन बम विस्फोट के मामलों की जांच के क्रम में यह तथ्य सामने आया है कि आतंकी संगठनों ने कुछ आतंकियों को शारीरिक प्रशिक्षण और आईईडी संबंधी प्रशिक्षण दिया था। 
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आतंकी घटनाओं की रोक के लिए केंद्र और राज्य बैठा रहे बेहतर समन्वय

सै‌न‌िक - फोटो : ANI
आतंकी घटनाओं का सामना करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय का तंत्र मजबूत किया गया है। मल्टी एजेंसी सेंटर को सुदृढ़ किया गया है। इससे राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचना प्रवाह तेज हुआ है। इस कारण कई आतंकी माड्युल्य ध्वस्त किए गए और मुठभेड़ों में आतंकियों को मार गिराने में भी लगातार सफलता मिल रही है। इस साल के साढ़े चार महीनों में 55 आतंकी घटनाएं हुईं हैं जिनमें सात सुरक्षा कर्मियों को शहीद होना पड़ा है।

एक नागरिक की भी मौत हुई है। इससे पहले 2013 में कश्मीर में 170, 2014 में 222, 2015 में 2018 आतंकी घटनाएं हुईं थीं। तीन साल में 146 जवान शहीद हुए और 61 नागरिकों को भी जान गंवानी पड़ी है। पिछले साल सीजफायर उल्लंघन की 253 घटनाएं हुई थीं। इस साल अबतक ऐसी घटनाओं में कमी देखी जा रही थी लेकिन सोमवार की रात को उड़ी में पाकिस्तान द्वारा गोलाबारी के बाद ऐसी घटनाओं में फिर से तेजी आने की आशंका जताई जाने लगी है।

लिहाजा बार्डर पर बीएसएफ और एलओसी पर सेना को सतर्क कर दिया गया है। सीजफायर उल्लंघन द्वारा कवर फायर देकर आतंकियों की घुसपैठ को कोशिश के मद्देनजर भी एडवाइजरी जारी की गई है।
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