केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम होने वाला है। लगभग साढ़े 500 साल तक अपने घर से बाहर रह रहे राम लला को PM मोदी उनके भव्य मंदिर में विराजित करेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि PM मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसकी शुरुआत रामलला के अपने मंदिर में विराजित होने से हो रही है।
इससे पहले राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर भी तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने दावा किया कि असम की जनता बड़ी संख्या में कांग्रेस की यात्रा का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में असम में उग्रवाद चरम पर था। इस दौरान हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ी। पीड़ित परिवार आज भी इंसाफ के इंतजार में आस लगाकर बैठे हैं। शाह ने अयोध्या में राम मंदिर और विकास को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर भी बयान दिया।
कांग्रेस शासन के दौरान, हजारों युवाओं ने जान गंवाई
असम पुलिस की पासिंग आउट परेड में शरीक होने के बाद संबोधन में गृह मंत्री शाह ने कहा, 'राहुल गांधी ने हाल ही में भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू की है। आज कुछ मीडिया कर्मियों से पूछा कि असम में क्या हुआ?' बकौल गृह मंत्री शाह, कांग्रेस शासन के दौरान, हजारों युवाओं ने अपनी जान गंवाई, असम में उग्रवाद व्याप्त था। कांग्रेस शासन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों ने कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा का विरोध करते हुए न्याय की मांग की है।
घुसपैठ पर गृह मंत्री शाह का बयान
गुवाहाटी में असम पुलिस कमांडो के पासिंग आउट परेड समारोह में शामिल हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 10 दशकों से चला आ रहा घुसपैठ का मुद्दा, 1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम...नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों से असम हमेशा प्रभावित रहा है। हालांकि, बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थियों के बावजूद असम पुलिस का इतिहास शानदार रहा है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को मात देने, मुद्दों से प्रभावी तरीके से लड़ने और जीतने का गौरवशाली इतिहास असम पुलिस से जुड़ा है।
गुवाहाटी में बोले गृह मंत्री, असम की अपनी भाषा क्यों नहीं?
असम में ही एक अन्य कार्यक्रम में गृह मंत्री शाह ने कहा, कई बार भाषा को विवाद का मुद्दा समझा जाता है। मैं मानता हूं कि एक देश के अंदर अनेक भाषा होना कमजोरी नहीं हो सकती है बल्कि ताकत है, इसे ताकत मानकर आगे बढ़ना चाहिए। बकौल शाह, असम से भी कम आबादी वाले इस दुनिया में लगभग 100 देश हैं। उन देशों की अपनी अलग भाषा हो सकती है तो असम की भाषा क्यों नहीं हो सकती? शाह ने यह टिप्पणी गुवाहाटी में पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान की।