केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के योगदान को याद करते हुए उन्हें ‘सच्चा स्वयंसेवक’ बताया। शाह ने सिंघल की जन्म शताब्दी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में सिंघल को याद करते हुए कहा कि सिंघल ने अपना पूरा जीवन इस आंदोलन और संगठन के काम में लगा दिया और कभी यह नहीं सोचा कि किसी एक व्यक्ति के जीवनकाल में ही कोई लक्ष्य पूरा हो जाए।
‘राम मंदिर का भूमि पूजन और निर्माण नहीं देख पाए सिंघल’
अमित शाह ने कहा कि यह अफसोस की बात है कि अशोक सिंघल न तो राम मंदिर का ‘भूमि पूजन’ देख पाए और न ही मंदिर को पूरा होते देख सके। हालांकि, उन्होंने अपने जीवन में किसी काम को पूरा करने की जल्दबाजी नहीं की। सिंघल राम मंदिर आंदोलन को ऐसा संघर्ष मानते थे जो कई पीढ़ियों तक चल सकता है और जिसमें जीत के मुकाम तक पहुंचने से पहले अनगिनत लोगों का योगदान होगा।
'2014 के बाद पांच साल में बनी नई तस्वीर'
गृह मंत्री ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मंदिर निर्माण के रास्ते में आने वाली सभी सरकारी अड़चनें को दूर किया गया। इसके बाद अयोध्या में पांच साल के भीतर बिना एक भी बूंद खून बहे भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ।
‘संकट के दौर’ में सिंघल से दिल्ली में मिलते थे शाह
अमित शाह ने अपने जीवन के एक दौर का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्हें कांग्रेस पार्टी की सरकार के दौरान जेल भेजा गया था, तब वह समय उनके लिए ‘संकट का दौर’ था। उन्होंने बताया कि उन तीन वर्षों के दौरान, जब तक वे सभी आरोपों से बरी नहीं हो गए, वह अक्सर दिल्ली स्थित VHP कार्यालय में अशोक सिंघल से मिलने जाते थे।
RSS प्रचारक से VHP के शीर्ष पद तक का सफर
शाह ने कहा कि छात्र जीवन में RSS प्रचारक के तौर पर शुरुआत करने से लेकर VHP में काम करने तक अशोक सिंघल ने हर जिम्मेदारी को सादगी, त्याग और पूरी निष्ठा के साथ निभाया। उनके मुताबिक, सिंघल का जीवन संगठन के प्रति समर्पण और अनुशासन का उदाहरण था।
लहूलुहान सिर वाली तस्वीर युवाओं को करती रहेगी प्रेरित
गृह मंत्री ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद सिंघल की खून से लथपथ सिर वाली तस्वीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के उद्देश्य और अपने काम के प्रति सिंघल का समर्पण लंबे समय तक युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा।
होसबोले बोले- हिंदू स्वाभिमान जगाने में सिंघल की अहम भूमिका
RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने भी अशोक सिंघल को याद करते हुए उन्हें ‘हिंदू स्वाभिमान’ जगाने वाली प्रमुख हस्तियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सिंघल के जीवन से प्रेरणा लेकर देश में ‘राम राज्य’ स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए। होसबोले ने कहा,'अशोक सिंघल जी व्यक्तित्व, उपलब्धि और नेतृत्व की ‘त्रिवेणी’ थे। वे संगठन, संघर्ष और समन्वय का संगम थे। वे सादगी, कड़ी मेहनत और अनुशासन का संगम थे। वे ज्ञान, भक्ति और कर्म का संगम थे।'
जन्म शताब्दी पर सालभर चलेंगे कार्यक्रम
होसबोले भारत मंडपम में अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसी कार्यक्रम के दौरान देश और विदेश में पूरे साल चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत की गई। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य VHP के पूर्व अध्यक्ष सिंघल के बताए रास्ते और उनके ‘अधूरे कामों’ को आगे बढ़ाना है।
निडरता और विनम्रता को बताया सिंघल की खासियत
दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि अशोक सिंघल के व्यक्तित्व में दो गुण खास तौर पर दिखाई देते थे—‘निडरता और विनम्रता’। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में सिंघल की भूमिका से दुनिया परिचित है। उनके अनुसार, VHP नेता ने अपने सभी प्रयास ‘हिंदू स्वाभिमान को जगाने’ के लिए किए।
‘राम राज्य’ के लिए काम करना ही सच्ची श्रद्धांजलि: होसबोले
RSS के दूसरे सबसे बड़े नेता होसबोले ने कहा कि हिंदू स्वाभिमान जगाने और लोगों के साझा सपनों को पूरा करने की दिशा में अशोक सिंघल एक प्रमुख व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि ‘राम राज्य’ की स्थापना के लिए अटूट संकल्प के साथ काम करते रहना ही अशोक सिंघल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
1942 में RSS से जुड़े, 1980 में VHP पहुंचे
अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था और वह 1942 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे। उन्होंने 1950 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह RSS के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए और आगे चलकर दिल्ली तथा हरियाणा के प्रांत प्रचारक की जिम्मेदारी संभाली।
VHP में महासचिव से अध्यक्ष तक पहुंचे
1980 में अशोक सिंघल को RSS की ओर से विश्व हिंदू परिषद में भेजा गया, जहां वह संयुक्त महासचिव बने। 1984 में उन्हें VHP का महासचिव बनाया गया। इसके बाद वह संगठन के अध्यक्ष पद तक पहुंचे और दिसंबर 2011 तक इस जिम्मेदारी पर रहे।
राम जन्मभूमि आंदोलन से देशभर में बने चर्चित चेहरा
1980 के दशक के आखिरी वर्षों और उसके बाद राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाने के कारण अशोक सिंघल देशभर में चर्चित हुए। VHP के प्रमुख चेहरों में शामिल सिंघल का 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
92वें जन्मदिन पर जैन आचार्य से मिले अमित शाह
इसी बीच, अमित शाह ने रविवार को अहमदाबाद में जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य पद्मसागर सुरिश्वर जी महाराज से उनके 92वें जन्मदिन पर मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। शाह ने ‘X’ पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। शाह ने कहा कि आचार्य पद्मसागर सुरिश्वर अपने प्रवचनों और तपस्या के जरिए लोगों को अहिंसा, करुणा और सदाचार के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य ने जैन धर्म की त्याग की समृद्ध परंपराओं और आदर्शों को जीवित रखा है।
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‘जीवन आध्यात्मिक साधना, संयम और जनसेवा का उदाहरण’
अमित शाह ने कहा कि आचार्य पद्मसागर सुरिश्वर का जीवन आध्यात्मिक साधना, संयम और जनसेवा का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने बताया कि वह अहमदाबाद के शेला में आचार्य के 92वें जन्मदिन पर उनसे मिले और उनका आशीर्वाद लिया। शाह ने ईश्वर से उनके स्वस्थ और दीर्घायु रहने की कामना भी की और कहा कि उनका आशीर्वाद समाज का मार्गदर्शन करता रहे। इस कार्यक्रम में अमित शाह ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और अन्य लोगों के साथ 43वीं ‘कैलाश श्रुतसागर ग्रंथसूची’ भी जारी की।