ओडिशा विधानसभा के सदस्यों ने शनिवार को पार्टी लाइन से हटकर सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर अपने वेतन में बढ़ोत्तरी की मांग की।
शून्यकाल में सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा के विपक्षी मुख्य व्हिप मोहन मांझी ने बताया कि विधायकों का वेतन और यात्रा भत्ता पहले 13 सितंबर, 2017 को बढ़ाया गया था।
उन्होंने कहा, "जैसा कि बाजार में मूल्य वृद्धि हुई है, विधायकों का वेतन भी उसी के अनुसार बढ़ाया जाना चाहिए।"
ताराप्रसाद बहिनीपति ने भाजपा सदस्य की मांग का किया समर्थन
कांग्रेस के व्हिप ताराप्रसाद बहिनीपति ने भाजपा सदस्य की मांग का समर्थन किया और दावा किया कि अन्य राज्यों के विधायकों को ओडिशा के विधायकों द्वारा प्राप्त राशि से बहुत अधिक वेतन मिलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विधायक विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बहुत यात्रा करते हैं लेकिन उन्हें इस तरह के खर्चों कीा तुलना में कम राशि मिलती है।
बहिनीपति ने कहा कि पूर्व विधायकों को पेंशन के रूप में केवल 30,000 रुपये मिलते हैं, जिसे भी महंगाई को देखते हुए बढ़ाया जाना चाहिए।
पूर्व और मौजूदा विधायकों की स्थिति पर विचार करे सरकार : राउत्रे
कांग्रेस विधायक सुरेश राउत्रे ने दावा किया कि पूर्व विधायकों वित्तीय स्थिति अनिश्चित है और उनमें से कई उचित उपचार प्राप्त करने में समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "सरकार को उनकी चिंता और मौजूदा विधायकों की स्थिति पर भी विचार करना चाहिए।"
सत्तारूढ़ बीजद सदस्य अमर प्रसाद सत्पथी ने दावा किया कि कई मौजूदा विधायक भी वित्तीय बाधाओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन बोलने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि वेतन, यात्रा भत्ता, पेंशन और चिकित्सा भुगतान में वृद्धि की जानी चाहिए।
स्पीकर ने राज्य सरकार को मांग पर विचार करने का दिया सुझाव
निर्दलीय विधायक मकरंदा मुदुली ने भी ओडिशा में विधायकों के वेतन में वृद्धि की मांग की। पार्टी लाइन से हटकर विधायकों ने अपने वेतन के बारे में चिंता व्यक्त की। स्पीकर बी.के.अरुखा ने राज्य सरकार को उनकी मांग पर विचार करने का सुझाव दिया।
राज्य सरकार ने पांच साल पहले विधायकों और मंत्रियों के वेतन में पचास प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की थी, जिससे प्रत्येक विधायक के लिए प्रति माह 1 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। पिछला वेतन संशोधन 2011 में किया गया था।