1952 में हुए थे पहले चुनाव
आजादी के बाद 15 अप्रैल 1948 की हिमाचल प्रदेश चीफ कमिश्नर के राज्यों के रूप में अस्तित्व में आया। 26 जनवरी 1950 को जब देश गणतंत्र बना तब हिमाचल प्रदेश को 'ग' श्रेणी के राज्य का दर्जा मिला। 1952 में राज्य में पहली बार चुनाव हुए।
तब सूबे में 36 विधानसभा सीटें थीं। मैदान में कांग्रेस के अलावा किसान मजदूर प्रजा पार्टी, शेड्यूल कास्ट फेडरेशन के उम्मीदवार खड़े थे। कांग्रेस ने 35 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। उसे 24 सीट पर जीत मिली। किसान मजदूर पार्टी के 22 प्रत्याशी मैदान में थे और तीन विधायक चुने गए। शेड्यूल कास्ट फेडरेशन के एक और आठ निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। कांग्रेस के यशवंत सिंह परमार हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। 1956 तक यानी चार साल 237 दिन उन्होंने सूबे की कमान संभाली।
इसके बाद विधानसभा भंग करके हिमाचल प्रदेश को केंद्र शासित राज्य बना दिया गया। ये दर्जा 1963 तक रहा। बाद में फिर इसे विधानसभा के साथ केंद्र शासित राज्य का दर्जा मिला। तब पहले केंद्र शासित राज्य में भी यशवंत सिंह परमार ही मुख्यमंत्री बने। उन्होंने एक जुलाई 1963 से चार मार्च 1967 तक केंद्र शासित राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
1967 में 60 विधानसभा क्षेत्रों वाली विधानसभा में चुनाव हुआ। सरकार बनाने के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। कांग्रेस ने 34 सीटों पर जीत हासिल की। भारतीय जनसंघ ने हिमाचल में पहली बार चुनाव लड़ा और सात पर विजय मिली। दो सीटें कम्युनिस्ट पार्टी के खाते में गए, जबकि स्वतंत्र पार्टी का एक उम्मीदवार चुनाव जीत गया। 16 निर्दलीय प्रत्याशी विधायक चुने गए थे। यशवंत सिंह परमार तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। परमार 1977 तक इस पद पर रहे।
इस बीच, 1971 में हिमाचल प्रदेश को वापस पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। इसके बाद 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को ही जीत मिली। 1972 में 68 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस के 53 प्रत्याशी जीते। भारतीय जनसंघ के पांच, लोकराज पार्टी हिमाचल प्रदेश के दो, सीपीआई (एम) के एक और सात निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी जीत हासिल की।