गृह मंत्रालय ने एक समिति गठित की थी। इस समिति ने परिवहन, जांच-सुरक्षा एवं निगरानी तंत्र को लेकर कई तरह की सिफारिशें की हैं। इनके क्रियान्वयन के लिए संबंधित एजेंसियों को सूचित कर दिया गया है। इसके अलावा पशु तस्करी रोकने के लिए बीएसएफ ने भी कुछ ठोस कदम उठाए हैं।
- सीमा पर 24 घंटे गश्त, नाकेबंदी और निगरानी चैकियों की स्थापना कर प्रभावशाली नियंत्रण करना
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- सीमा चौकियों के सुरक्षा तंत्र की लगातार समीक्षा की जा रही है
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- बॉर्डर पर तेज रोशनी की व्यवस्था की गई है
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- अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नदी क्षेत्र में वाटर क्राफ्ट नौका व फ्लोटिंग बीओपी का इस्तेमाल करना
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- सीमा पर बाॅर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा संयुक्त गश्त लगाना
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- इंटेलीजेंस एजेंसियों की मदद लेना
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, गाय व बैल की तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र पश्चिम बंगाल है। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उतराखंड व पंजाब से पशुओं को सड़क के रास्ते पहले पश्चिम बंगाल लाया जाता है। यहां से उन्हें नदी-नालों और दूसरे कच्चे रास्तों के जरिए बांग्लादेश भेज देते हैं।
ऐसा नहीं है कि उत्तरी भारत के राज्यों से लेकर पश्चिम बंगाल, असम व मेघालय तक रास्ते में कोई चैक पोस्ट नहीं पड़ती। कई राज्यों के बॉर्डर आते हैं, लेकिन तस्करों की सेटिंग के आगे हर बॉर्डर व चैक पोस्ट इनके लिए आगे की राह खोल देते हैं।
राज्य की सीमा है तो पांच सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की रिश्वत देनी पड़ती है। छोटी-मोटी चैक पोस्ट पार करने में सौ से पांच सौ रुपये लगते हैं। बीच में कई बार डीटीओ-आरटीओ या किसी दूसरे विभाग का कोई अधिकारी पशुओं से भरी गाड़ी रोक लेता है तो उसके साथ भी सेटिंग हो जाती है। असम सहित कई इलाकों में गायों को नदी में उतार दिया जाता है और बांग्लादेश में निकाल लेते हैं।
साउथ बंगाल में पशु तस्करी का मुख्य केंद्र मुर्शिदाबाद है
साउथ बंगाल में पशु तस्करी का मुख्य केंद्र मुर्शिदाबाद माना जाता है। 24 परगना नॉर्थ भी तस्करी का एक बड़ा अड्डा है। यहां से लोकल पुलिस और कस्टम विभाग की मिलीभगत से पशु बांग्लादेश की सीमा में धकेल दिए जाते हैं। कई जगह ऐसी हैं जहां पर बाड़ आदि नहीं है, वहां से भी तस्करी होती है। असम में ब्रहमपुत्र नदी के रास्ते गायों को बांग्लादेश पहुंचा देते हैं। नदी में तैरते वक्त गाय का केवल सिर दिखता है, बाकी हिस्सा पानी में रहता है। यह दूर बैठे सुरक्षा कर्मियों को गच्चा देने के लिए काफी होता है।
अब मेघालय में भी बड़े पैमाने पर बीफ की मांग बढ़ रही है.......
बांग्लादेश में तस्करी के बाद मेघालय अब बीफ का केद्र बनता जा रहा है। हालांकि यहां पश्चिम बंगाल की तरह बड़े स्तर पर पशु तस्करी नहीं होती, बल्कि छोटे छोटे समूहों में पहाड़ी रास्तों के ज़रिए गायों को यहां लाया जाता है। सुरक्षा दल पहाड़ पर तैनात रहते हैं, जबकि तस्कर नीचे से गायों को आगे बढ़ा देते हैं। गोवाहाटी के निकट खानापाड़ा को बीफ का हाट कहा जाने लगा है।
भारत से 5,000 से 10,000 में गाय खरीदते हैं और सीमा पार 50 हजार से 80 हजार रुपये में बेच देते हैं
पशु तस्कर भारतीय राज्यों से मामूली कीमत पर गाय खरीदते हैं। पांच से दस हजार रुपये में उन्हें गाय मिल जाती है। अगर बैल है तो वह और भी सस्ता मिलता है। अधिकांश गाय दूध देने वाली नहीं होती। इनकी उम्र भी ज्यादा होती है।