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#नोटबंदी 19वां दिन: जानें, ATM से क्यों कम निकल रहे 500 के नोट

Mon, 28 Nov 2016 12:53 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद से कैश को लेकर समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। कई जगहों पर बैंकों के एटीएम अब भी बंद पड़े हैं। जो चल भी रहे हैं, उनमें ज्यादार 2000 रुये के नोट निकल रहे हैं। भारत सरकार ने 500 रुपये का नया नोट भी जारी किया है, लेकिन वे जनता को कम ही उपलब्ध हो रहे हैं। वहीं, 2000 के नोट का गुलाबी रंग और 500 रुपये का अमेरिकी डॉलर की तरह दिखना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिर इस सबके पीछे क्या वजह है, इसका जवाब भारतीय रिजर्व बैंक ने दिया है।
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आरबीआई के मुताबिक नए नोटों की छपाई चार जगहों से हो रही है। 2000 रुपये के नोट मैसूर स्थित सरकारी प्रेस हो छप रहे हैं तो वहीं 500 रुपये के नोट सरकार के स्वामित्व वाली नासिक और देवास की प्रिंटिंग प्रेस से छप रहे हैं।

वहीं, आरबीआई द्वारा चलित चौथी प्रिंटिंग प्रेस, जोकि पश्चिम बंगाल के सालबोनी में है, उससे 100 रुपये के नोट छापे जा रहे हैं। यही वजह है कि नोटों के रंग और आकार में इस तरह के अंतर दिखाई दे रहे हैं। 
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इतने नोट छापने के लिए लगेगा 7 महीने का वक्त: चिदंबरम

- फोटो : अमर उजाला
इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक एक आरबीआई अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त में बेहद गुस्से में बताया कि 500 रुपये के नोटों की सप्लाई पर आरबीआई की चल ही नहीं रही है। इसलिए आरबीआई पर दोष क्यों मढ़ा जाए? सरकार ही सारे निर्णय ले रही है। हम लोगों को बस वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक के बाद एक नोटिफिकेशन मिल रहे हैं। नोटों की कम सप्लाई के पीछे सरकार की लेन-देन और विनिमय को लेकर गलतफहमी है। 

एक कारण यह भी है कि सरकारी प्रेस से 500 रुपये के नोट छपने से पहले 2000 रुपये के नोट छपना शुरू हो गया था। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 9026 करोड़ 500 और 1000 के नोट नोटबंदी के फैसले के पहले चलन में थे। वहीं, पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के मुताबिक इतने नोटों को नए नोटों से बदलने के लिए कम से कम सात महीने का वक्त लगेगा। लेकिन सरकार हकीकत को स्वीकारने के मूड में नहीं है।
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