जेल में बंद झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को दावा किया कि सोरेन ने अवैध कब्जे, अधिग्रहण और अपराध की आय से जुड़ी कथित गतिविधियों के लिए एक राजस्व अधिकारी भानु प्रताप प्रसाद की मदद ली।
एजेंसी के मुताबिक, प्रसाद ने अवैध कब्जे, अधिग्रहण और आपराधिक तरीकों से हासिल संपत्तियों पर कब्जे से जुड़े प्रयासों में कई व्यक्तियों की मदद की और अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया।
ईडी का यह बयान तब सामने आया है, जब उसकी रांची इकाई ने सोरेन और चार अन्य के खिलाफ भूमि घोटाले के एक मामले में अभियोजन शिकायत दायर की। उनके खिलाफ रांची के बरियातू में 8.8 एकड़ की अचल संपत्ति हासिल करने, रखने और छिपाने के लिए धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है।
ईडी ने कहा कि भूमि घोटाले के मामलों में उसकी जांच में आरोपियों में से एक भानु प्रताप प्रसाद की भूमिका का खुलासा हुआ है। एजेंसी ने कहा कि उसे पता चला है कि झारखंड में भू-माफियाओं का एक रैकेट सक्रिय था, जो रांची में जमीन के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा करता था। यह भी खुलासा हुआ है कि भू माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए भूमि के मालिका हक के दस्तावेज भी जाली हैं।
बयान में आगे कहा गया है कि इसके बाद फर्जी भूमि दस्तावेजों के आधार पर ऐसे भूखंड अन्य लोगों को बेच दिए जाते थे। इसमें कहा गया है कि मालिकाना हक के मूल भूमि रिकॉर्ड से या तो छेड़छाड़ की जाती थी या छिपाई जाती थी, ताकि अवैध अधिग्रहण, कब्जे और ऐसी संपत्तियों का इस्तेमाल किया जा सके। भानु प्रताप प्रसाद, बिनोद सिंह, हिलारियस कच्छप और राज कुमार पाहन नाम के चार अन्य लोगों को भी संपत्ति के अवैध अधिग्रहण और कब्जे में हेमंत सोरेन की मदद करने मे उनकी भूमिका के लिए ईडी की अभियोजन शिकायत में आरोपी के रूप में आरोपित किया गया है।