फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mining Lease Allotment Cases: हेमंत सोरेन को चुनाव आयोग ने दिया आखिरी मौका, 28 जून को होना होगा पेश 

Tue, 14 Jun 2022 04:36 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हेमंत सोरेन को पहले 31 मई को चुनाव आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने और समय मांगा था और उनकी उपस्थिति 14 जून के लिए पुनर्निर्धारित की गई थी।
विज्ञापन
हेमंत सोरेन - फोटो : Social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वकील की अनुपलब्धता का हवाला देने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खनन पट्टा आवंटन मामले में उसके सामने पेश होने के लिए चुनाव आयोग ने अधिक समय दिया है। व्यक्तिगत सुनवाई में सोरेन को या तो व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से उपस्थित होना था, सुनवाई का वक्त मंगलवार को दोपहर 3.00 बजे के लिए निर्धारित किया गया था।

विज्ञापन


आयोग के सूत्रों ने कहा कि चूंकि यह दूसरी बार है जब उनके मामले में व्यक्तिगत सुनवाई स्थगित कर दी गई है, इसलिए 28 जून की नई तारीख इस शर्त के साथ दी गई है कि यह इस तरह की सुनवाई का आखिरी मौका होगा। एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा नहीं करने पर आयोग सुनवाई की अगली तारीख, जो 28 जून है, उससे पहले उनके द्वारा दायर लिखित दलीलों के आधार पर आगे बढ़ेगा। 

चुनाव आयोग ने 31 मई के बाद 14 जून की दी थी तारीख 
हेमंत सोरेन को पहले 31 मई को चुनाव आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने और समय मांगा था और उनकी उपस्थिति 14 जून के लिए पुनर्निर्धारित की गई थी। सोरेन ने चिकित्सा कारणों से अपने वकील की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए फिर से चुनाव आयोग के सामने पेश होने के लिए और समय मांगा था। मई में आयोग ने सोरेन को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए के तहत नोटिस जारी किया था, जो सरकारी अनुबंधों के लिए किसी विधायक की अयोग्यता से संबंधित है।
विज्ञापन


उनके जवाब को पढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने सोरेन को अपने सामने पेश होने को कहा था। ऐसे मामलों की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग एक अर्ध-न्यायिक निकाय की तरह काम करता है। हाल ही में हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन को धारा 9ए के तहत नोटिस दिए जाने के बाद उनके वकील के माध्यम से चुनाव आयोग के समक्ष पेश हुए। उनके वकील ने दावा किया था कि झामुमो विधायक के खिलाफ एक खनन फर्म के सह-मालिक को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी और इस मामले की सुनवाई में चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें