प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी अनूप कुमार गुप्ता को वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाला मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई इस घोटाले से संबंधित 3600 करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की गई।
अधिकारियो ने बताया कि केआरबीएल लिमिटेड के निदेशक गुप्ता को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के मामलों की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया और अदालत ने गुप्ता को पांच दिन के लिए जांच एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। उनकी कंपनी इंडिया गेट बासमती चावल बनाती है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कारोबारी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। ऐसे में नए सुबूत के सामने आने के बाद उनको हिरासत में लेकर पूछताछ किया जाना जरूरी है।
ईडी ने रिमांड आवेदन में कहा कि विभिन्न राजनीतिक शख्सियतों, अफसरों और वायुसेना के अधिकारियों को 70 मिनियन यूरो की रिश्वत देने के लिए दो स्रोत का इस्तेमाल किया गया। यह रिश्वत 12 हेलिकॉप्टरों की खरीद के लिए अगस्तावेस्टलैंड कंपनी की मदद करने के बदले में दी गई। एजेंसी ने कहा कि ईडीएस इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग सर्ल, ट्यूनिशिया को अगस्तावेस्टलैंड से 24.37 मिलियन यूरो मिले और 12.4 मिलियन यूरो इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड मॉरीशस को भेजे गए। रिश्वत की रकम को रवासी अल खलीज जनरल ट्रेडिंग (आरएकेजीटी) एलएलसी दुबई समेत विभिन्न कंपनियों को हस्तांतरित की गई। आरएकेजीटी एलएलसी दुबई को 2007 में केआरबीएल डीएमसीसी, दुबई द्वारा शामिल किया गया। ईडी का आरोप है कि आरोपी अनूप इस कंपनी के निदेशकों में से एक थे। केआरबीएल डीएमसीसी केआरबीएल लिमिटेड (इंडिया) की सहयोगी कंपनी है।
ईडी ने कहा कि 2009 में केआरबीएल डीएमसीसी ने आरएकेजीटी में अपने पूरी हिस्सेदारी (49 फीसदी) को अनुराग पोटदार के नाम पर हस्तांतरित कर दी लेकिन वास्तविकता में, आरएकेजीटी गुप्ता के जरिए केआरबीएल लिमिटेड के नियंत्रण में रही। इस तरह आरएकेजीटी को मिली रिश्वत की रकम केआरबीएल लिमिटेड को हस्तांतरित हुई। एजेंसी ने दावा किया कि पिछले साल दिसंबर में कुछ दस्तावेज से इन लिंक का पता चला। साथ ही यह भी खुलासा हुआ कि गुप्ता आरएकेजीटी कंपनी के वित्तीय लेनदेन का नियंत्रण कर रहे थे। गुप्ता का नाम 208 मिलियन डॉलर के एक अन्य रक्षा करार घोटाले में भी शामिल है। इसमें एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी एंब्रेयर शामिल है। इस मामले में पिछले साल दिसंबर में चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया गया था।