बंगाल की उत्तरी खाड़ी 28 जून 2023 से तीव्र समुद्री गर्मी का अनुभव कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके कारण भारत के आमतौर पर शुष्क उत्तर-पश्चिम में अत्यधिक वर्षा हुई है। बंगाल की खाड़ी विशेषकर इसका उत्तरी भाग, आमतौर पर गर्म रहता है। यह इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रक्षेप पथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाता है।
मानसून के लिए गर्म बंगाल की खाड़ी की आवश्यक
मानसून के दौरान बंगाल की उत्तरी खाड़ी गर्म हो जाती है। इसके गर्म होने पर यहीं से अरब सागर के ऊपर दक्षिण-पश्चिम से चलने वाली मानसूनी हवाएं बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करती हैं और नमी को पंप करने के लिए यू-टर्न लेती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय में वायुमंडलीय और समुद्री विज्ञान के प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड्डे के मुताबिक भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून के लिए गर्म बंगाल की खाड़ी की आवश्यकता होती है लेकिन जब हम हीटवेव के बारे में बात करते हैं तो हम यहां सामान्य से अधिक गर्म बंगाल की खाड़ी के बारे में बात कर रहे हैं। वे विशेष रूप से उत्तर पश्चिम भारत में कुछ अत्यधिक वर्षा में योगदान दे रहे हैं।
28 जून के बाद बढ़ी हीटवेव की तीव्रता
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार दक्षिणी प्रायद्वीप के 10 मौसम उपविभागों में से छह और मध्य भारत के 10 उपविभागों में से चार ने इस मानसून के मौसम के दौरान कम वर्षा की सूचना दी है जबकि उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के सभी उपविभागों ने सामान्य से लेकर बहुत अधिक वर्षा की सूचना दी है। यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 28 जून के बाद बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के ऊपर समुद्री हीटवेव की तीव्रता में मध्यम से लेकर चरम श्रेणी की समुद्री हीटवेव की तीव्रता में वृद्धि हुई है। चूंकि समुद्री हीटवेव भी एक दैनिक मौसम की घटना है इसलिए, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर क्षेत्र में पूरे जून में कुछ हद तक हीटवेव वाले दिनों का अनुभव होता है। अब यह तीव्रता 28 जून, 2023 से बढ़ गई है।
समुद्री जैव विविधता पर भी प्रभाव डालती हैं समुद्री गर्मी की लहरें
आईएमडी के अनुसार 2023 में सामान्य से अधिक गर्म बंगाल की खाड़ी पहले ही चक्रवात मोचा का अनुभव कर चुकी है, जो एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान था। मौसम संबंधी प्रभावों के अलावा समुद्री गर्मी की लहरें समुद्री जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। एक अध्ययन के अनुसार मई 2020 में समुद्री गर्मी के बाद तमिलनाडु तट के पास मन्नार की खाड़ी में 85 प्रतिशत मूंगे ब्लीच हो गए। बंगाल की खाड़ी में मौजूदा गर्मी सुंदरबन में मैंग्रोव पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।