हार्ट अटैक में हाथ-पैर ठंडे पड़ना क्यों गंभीर संकेत है?
नए अध्ययन में हार्ट अटैक के मरीजों के अलग-अलग लक्षणों और उनके इलाज के दौरान होने वाली मौत के बीच संबंध देखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि एसटी-सेगमेंट बढ़ने वाले हार्ट अटैक यानी एसटीईएमआई के मरीजों में हाथ-पैर ठंडे होने की स्थिति अस्पताल में मौत के ज्यादा जोखिम से जुड़ी थी। इसका एक कारण शरीर में खून का पर्याप्त प्रवाह न होना हो सकता है। जब दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता, तो शरीर के दूसरे हिस्सों तक खून की पहुंच कम हो सकती है और हाथ-पैर ठंडे पड़ सकते हैं।
सांस फूलने और फेफड़ों में खरखराहट को क्यों नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?
हार्ट अटैक के दौरान केवल सीने में दर्द ही नहीं, सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। नए शोध में फेफड़ों में सुनाई देने वाली खरखराहट को भी एसटीईएमआई मरीजों में अस्पताल में मृत्यु के अधिक जोखिम से जोड़ा गया है। इसका संबंध फेफड़ों में तरल जमा होने और दिल की पंप करने की क्षमता प्रभावित होने जैसी गंभीर स्थितियों से हो सकता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की जानकारी के मुताबिक, सांस फूलना भी एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम से जुड़े लक्षणों में शामिल है।
क्या सीने में दर्द न हो तो हार्ट अटैक का खतरा नहीं रहता?
ऐसा मानना सही नहीं है। हार्ट अटैक के लक्षण व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकते हैं। सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस फूलना, कमजोरी, पसीना और चक्कर जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। इसलिए केवल सीने में दर्द को ही हार्ट अटैक की पहचान मानना ठीक नहीं है। खासकर जब अचानक सांस लेने में परेशानी हो, शरीर ठंडा पड़ने लगे या मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
ध्यान रखने वाले प्रमुख संकेत क्या?
- अचानक या लगातार सांस फूलना।
- हाथ-पैर असामान्य रूप से ठंडे पड़ना।
- सांस लेते समय फेफड़ों में खरखराहट सुनाई देना।
- सीने में दर्द, दबाव या भारीपन।
- अचानक कमजोरी, पसीना या चक्कर जैसी परेशानी।
अगर ऐसे लक्षण अचानक और गंभीर रूप से दिखाई दें तो इसे सामान्य परेशानी समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। हार्ट अटैक एक आपात स्थिति है और जल्दी चिकित्सा सहायता मिलना महत्वपूर्ण होता है।
भारत में दिल से जुड़ी बीमारी की चुनौती कितनी बड़ी है?
भारत में सिर्फ हार्ट अटैक ही नहीं, जन्मजात हृदय रोग भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 1990 से 2021 के बीच जन्मजात हृदय रोग से जुड़े करीब 15 लाख शिशुओं की मौत हुई। हर साल लगभग 1.8 से 2 लाख बच्चे किसी न किसी हृदय विकार के साथ पैदा होते हैं। इससे साफ है कि दिल से जुड़ी बीमारियों को लेकर समय पर पहचान और इलाज बेहद महत्वपूर्ण है। हार्ट अटैक के मामले में भी शुरुआती संकेतों को समझना और इलाज में देरी नहीं करना मरीज के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।