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Health Ministry: राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता नीति तैयार करने पर हो रहा काम, जानें क्या है इसका उद्देश्य

Sun, 06 Aug 2023 06:02 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित, स्वस्थ और कलंक से मुक्त तरीके से मासिक धर्म का अनुभव कर सकें।
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स्वास्थ्य मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता नीति तैयार करने पर काम कर रहा है जिसका उद्देश्य सुरक्षित और स्वच्छ मासिक धर्म उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित करना, स्वच्छता सुविधाओं में सुधार करना, सामाजिक वर्जनाओं पर ध्यान देना और एक सहायक वातावरण को बढ़ावा देना है।

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आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इन उपायों के माध्यम से यह नीति बाधाओं को तोड़ने, कलंक को खत्म करने और एक ऐसे समाज का निर्माण करने का प्रयास करती है जहां मासिक धर्म स्वच्छता को प्राथमिकता दी जाती है और लैंगिक समानता, शिक्षा और समग्र विकास को बढ़ावा मिलता है। सूत्रों ने बताया कि विभिन्न हितधारकों के साथ एक राष्ट्रीय परामर्श आयोजित किया गया और व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की गई।

एक सूत्र ने कहा, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित, स्वस्थ और कलंक से मुक्त तरीके से मासिक धर्म का अनुभव कर सकें।सूत्र ने कहा, समय के साथ जागरूकता बढ़ी है लेकिन मासिक धर्म वाले लोगों की विविध आवश्यकताओं को व्यापक रूप से संबोधित करने के लिए और अधिक निवेश की आवश्यकता है। भारत अपनी विशाल और विविध आबादी के साथ एक व्यापक मासिक धर्म स्वच्छता नीति तैयार करने पर काफी जोर दे रहा है।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, 15-24 आयु वर्ग की 78 प्रतिशत महिलाएं अपने मासिक धर्म चक्र के दौरान सुरक्षा के स्वच्छ तरीके का उपयोग करती हैं, जो कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के दौरान 58 प्रतिशत थी। नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, इनमें से 64 प्रतिशत महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं, 50 प्रतिशत कपड़े का उपयोग करती हैं और 15 प्रतिशत स्थानीय रूप से तैयार नैपकिन का उपयोग करती हैं।

लड़कियों के लिए शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि जिन महिलाओं ने 12 या उससे अधिक वर्षों तक स्कूली शिक्षा प्राप्त की है, उनमें स्कूली शिक्षा न लेने वाली महिलाओं की तुलना में स्वच्छता पद्धति का उपयोग करने की संभावना दोगुनी से भी अधिक है। अगर हम स्थान के संदर्भ में देखें तो 73 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं और 90 प्रतिशत शहरी महिलाएं मासिक धर्म सुरक्षा की स्वच्छ पद्धति का उपयोग करती हैं।

सूत्र ने कहा, यह नीति वंचित और कमजोर आबादी को प्राथमिकता देने, मासिक धर्म स्वच्छता संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने और उनकी विशिष्ट जरूरतों को संबोधित करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है। नीति का उद्देश्य महिलाओं, लड़कियों, पुरुषों और लड़कों सहित लोगों के लिए एक सक्षम वातावरण स्थापित करना है, ताकि उन्हें मासिक धर्म के बारे में सही जानकारी मिल सके और इसके आसपास के मिथकों, कलंक और लैंगिक मुद्दों का समाधान किया जा सके।

आधिकारिक सूत्र ने बताया कि इसका उद्देश्य घरों, स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों सहित सभी स्थानों पर मासिक धर्म के अनुकूल वातावरण बनाना और पर्यावरण की दृष्टि से स्थायी मासिक धर्म अपशिष्ट निपटान को मजबूत करना है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 2014 में स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण पहल में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन को शामिल किया था और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के साथ 2015 में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश लॉन्च किए थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दायरे में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम ने किशोर आबादी के लिए सेवाओं, वस्तुओं और सहायता तक पहुंच में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया है। जन औषधि सुविधा केंद्रों के तहत सब्सिडी वाले ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल पैड की शुरुआत भी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर रही है।

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