केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की दो अलग-अलग रिपोर्टें बताती हैं कि वर्ष 2014 से अब तक देश में एमबीबीएस सीटों की संख्या में करीब 75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2014 से पहले देश के मेडिकल कॉलेजों में कुल 51,348 एमबीबीएस सीटें थीं, जिनकी संख्या अब 89,875 पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 से 2021 के बीच आयोजित नीट परीक्षा में करीब 35 फीसदी से अधिक छात्रों की संख्या बढ़ी है।
यूक्रेन संकट के दौरान विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पर उठे सवालों के बीच सरकारी आंकड़ों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में हर साल नीट पास करने वाले केवल 10 फीसदी छात्र ही भारत के किसी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ले पाते हैं। बाकी 90 फीसदी छात्र अपनी पढ़ाई के लिए विदेश पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसा इसलिए है कि भारत में चिकित्सा शिक्षा की अत्यधिक मांग के आगे एमबीबीएस सीटों की संख्या काफी कम है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की दो अलग-अलग रिपोर्टें बताती हैं कि वर्ष 2014 से अब तक देश में एमबीबीएस सीटों की संख्या में करीब 75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2014 से पहले देश के मेडिकल कॉलेजों में कुल 51,348 एमबीबीएस सीटें थीं, जिनकी संख्या अब 89,875 पहुंच गई है। बावजूद इसके हर साल नीट पास करने वाले करीब 10 फीसदी छात्र ही देश के सरकारी या फिर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल कर पाते हैं। मंत्रालय की दूसरी रिपोर्ट बताती है कि देश में 596 सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज हैं।
देश में मेडिकल कॉलेजों की स्थिति
89,875 एमबीबीएस सीटें
596 कॉलेज
313 सरकारी कॉलेजों में 46,560 सीटें
283 निजी कॉलेजों में 43,315 सीटें
पांच सालों में 35 फीसदी छात्रों की संख्या बढ़ी
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रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 से 2021 के बीच आयोजित नीट परीक्षा में करीब 35 फीसदी से अधिक छात्रों की संख्या बढ़ी है। हालांकि इस दौरान 20 हजार से अधिक एमबीबीएस सीटों में भी इजाफा हुआ है, लेकिन छात्रों की कुल संख्या के आगे सीट फिर भी कम हैं।
साल
कुल सीट
नीट पंजीयन
पास छात्र
2017
67,523
11,38,890
6,11,539
2018
70,433
13,26,725
7,14,562
2019
80,312
15,19,375
7,97,042
2020
85,025
15,97,435
7,71,500
2021
89,875
16,14,777
8,70,074
तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में सबसे अधिक मेडिकल कॉलेजों हैं। अगर राज्यवार मेडिकल कॉलेज और एमबीबीएस सीटों के बीच तुलना करें तो कहीं कॉलेजों की संख्या कम है तो कहीं सीटें कम हैं।
सिक्किम देश का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां एक भी सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के पूर्व सदस्य डॉ. विनय अग्रवाल का कहना है कि जिन छात्रों को यहां प्रवेश नहीं मिल पाता है, उनमें से हर कोई विदेश नहीं जा पाता है, 90 में से 20 से 30 फीसदी छात्र विदेश जाते हैं, बाकी डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं कर पाते।