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स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया बोले: बूस्टर डोज और बच्चों के टीकाकरण पर जल्दबाजी नहीं, विपक्ष से की वैज्ञानिकों पर भरोसा रखने की अपील

Fri, 03 Dec 2021 04:01 PM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन लोकसभा में कोरोना और ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठा। ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की जान जाने वाले सवालों पर मंडाविया ने कहा कि पंजाब ने ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत होने की सूचना दी है, बाकी राज्यों से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है।
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लोकसभा में जवाब देते मंडाविया - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संसद के शीतकालीन सत्र का आज पांचवां दिन था। आज लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज और बच्चों के टीकाकरण पर सरकार कोई जल्दबाजी नहीं बरत रही। सरकार वैज्ञानिकों की सलाह के बाद ही बच्चों के टीकाकरण और बूस्टर डोज पर कोई भी फैसला करेगी। मंडाविया ने लोकसभा में कोरोना की स्थिति पर चर्चा के दौरान कहा कि कोरोना के इन हालातों के बीच हमें अपने वैज्ञानिकों पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से भी वैज्ञानिकों पर भरोसा करने की अपील की।
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मंडाविया ने कहा कि राज्य सरकारों को पत्र लिखकर ऑक्सीजन की कमी से मौतों पर जवाब मांगा था, जिसमें 19 राज्यों ने अपना डेटा भेज दिया है। केवल पंजाब ने ऑक्सीजन की कमी के कारण चार संदिग्ध मौतों की जानकारी दी है। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया लोकसभा में ऑक्सीजन की कमी के चलते मौतों के सवाल पर जवाब दे रहे थे। संसद में कोरोना को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
 
भारत में कुल 3.46 करोड़ मामले सामने आए
मंडाविया ने लोकसभा में जानकारी दी कि भारत में कोरोना के 3.46 करोड़ मामले सामने आए हैं और 4.6 लाख लोगों की मौत हुई है। यह कुल मामलों का 1.36% है। भारत में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 25,000 मामले और 340 मौतें दर्ज की गईं, यह दुनिया में सबसे कम है। 
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मोदी सरकार में कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए काम चल रहा है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की अनदेखी करने वाली पिछली सरकारों को दोष दिए बिना सरकार ने परिणामों के लिए काम किया। पिछले दो वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में निर्णय दिखाता है कि यह सरकार इच्छाशक्ति के साथ काम करती है, शक्ति से नहीं। 

कोरोना का पहला मामला केरल में 13 जनवरी 2020 को आया था
मंडाविया ने कहा कि भारत में पहला कोविड-19 मामला 13 जनवरी 2020 को केरल में सामने आया था। लेकिन केंद्र द्वारा गठित संयुक्त निगरानी समिति की पहली बैठक 8 जनवरी 2020 को हुई थी। इसका मतलब है कि हम सतर्क थे, मामला दर्ज होने से पहले एक समिति बनाई गई थी और इसने काम करना शुरू कर दिया था। 

उन्होंने कहा, एक समय था जब वैक्सीन पर रिसर्च करने के बाद उसे अप्रूवल मिलने में तीन साल लग जाते थे। इसलिए कोई भी शोध नहीं करता था। हमने उन नियमों को खत्म कर दिया और एक साल के भीतर शोध के बाद देश को वैक्सीन मिल गई। यह सुविधा पीएम मोदी ने दी है। 

ब्लैक फंगस के 51,775 मामले
देश में 29 नवंबर तक ब्लैक फंगस के 51,775 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने लोकसभा में बताया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। केंद्र सरकार ने कोविड की दूसरी लहर के दौरान ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों की चुनौती से निपटने में राज्यों की मदद की है। मंत्रालय ने पोर्टल बनाकर इस पर राष्ट्रव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए।

12-17 आयु वर्ग के बच्चों को कोविड वैक्सीन देने पर विचार
कोविड-19 वैक्सीन प्रशासन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (एनईजीवीएसी) और प्रतिरक्षण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) 12 से 17 साल के बच्चों को वैक्सीन दिए जाने संबंधी वैज्ञानिक तथ्यों पर विचार कर रहे हैं। स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। 

उन्होंने कहा कि फिलहाल बच्चों और किशोरों के लिए कोविड वैक्सीन के आयात का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। एनईजीवीएसी और एनटीएजीआई को इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। बच्चों के लिए स्वदेशी वैक्सीन पर पवार ने कहा कि फिलहाल ड्र्ग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से कैडिला हैल्थकेयर की जाइकोविड वैक्सीन के 12 वर्ष से अधिक के बच्चों पर आपात काल में नियंत्रित इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। यह देश में वैक्सीन के तीसरे फेज के अंतरिम क्लीनिकल ट्रायल के डाटा पर आधारित है। अब भारत बायोटेक 12 से 18 वर्ष के स्वस्थ स्वयंसेवकों पर कोवाक्सिन के 2/3 फेज के क्लीनिक ट्रायल पर विचार कर रहा है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया 2 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 1200 बच्चों पर नैनौपार्टिकल वैक्सीन (तरल) कोवोवैक्स का ट्रायल कर रहा है।

कोवाक्सिन एक साल तक इस्तेमाल लायक
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (सीडीएसओ) ने प्रमाणित किया है कि कोविड-19 की वैक्सीन कोवाक्सिन उत्पादन के 12 महीने, कोविशील्ड नौ महीने और जाइकोविड 6 महीने तक इस्तेमाल लायक रहती हैं। कोविड वैक्सीन बूस्टर डोज के संबंध में मांडविया ने कहा कि एनईजीवीएसी और एनईजीवीएसी इस संबंध में वैज्ञानिक तथ्यों पर विचार कर रही हैं। वैक्सीन से कितने समय तक प्रतिरक्षा मिलती है, इस संबंध में दुनियाभर में शोध चल रहे हैं।

कोविशील्ड 2.5 और कोवाक्सिन का मासिक उत्पादन 5-6 करोड़
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस समय कोविड रोधी कोविशील्ड की मासिक उत्पादन क्षमता 2.5 से 2.75 करोड़ खुराक मासिक है। लोकसभा में स्वास्थ्य राज्यमंत्री पवार ने बताया कि भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड हैदराबाद के मुताबिक, उसकी मासिक उत्पादन क्षमता 5-6 करोड़ डोज मासिक है।
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