बिहार में माताओं ने जन्म के एक घंटे बाद अपने होने वाले बच्चों को दूध पिलाना कम कर दिया है। 2015-16 में आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि पहले जहां 34 फीसदी से ज्यादा माताएं जन्म के एक घंटे में बच्चों को दूध पिलाती थीं वहीं अब यह आंकड़ा कम हो गया है। हालिया जारी आंकड़ों के मुताबिक अब 31 फीसदी माताएं ही जन्म के एक घंटे में नवजात को दूध पिलाती हैं।
न फोलिक एसिड और न आयरन की दवा
गर्भवती महिलाएं न तो फोलिक एसिड की दवाएं लेती हैं और न ही आयरन की दवाएं लेती हैं। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक दवाओं को लेने का प्रतिशत पिछली बार जारी हुए सर्वे की तुलना में इस बार बढ़ा है। पिछली बार जहां यह 2.3 फीसदी था वहीं इस बार यह आंकड़ा 9.3 फीसदी है।
कैंसर को लेकर जागरूकता न के बराबर
कैंसर की जागरूकता को लेकर प्रदेश की महिलाएं सजग नहीं हैं। सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और ओरल कैंसर के प्रति 1 फीसदी से भी कम महिलाओं में जागरूकता है। यानीकि 99 फीसदी से ज्यादा बिहार की महिलाएं कैंसर की जांच के लिए कभी अस्पताल गयीं ही नहीं।