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मुंबई विस्फोट: बॉम्बे हाईकोर्ट में 18 वर्ष बाद दोषियों की अपील पर सुनवाई, अदालत का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जोर

Mon, 15 Jul 2024 09:43 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

11 जुलाई, 2006 को पश्चिम रेलवे की सात ट्रेनों में अलग-अलग स्थानों पर सात विस्फोट हुए। इसमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 वर्ष के बाद विशेष पीठ का गठन किया है। 

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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में सिलसिलेवार ट्रेन विस्फोट मामले के 18 वर्ष बाद सोमवार को दोषियों की ओर से दायर अपील पर सुनवाई शुरू की। आपको बता दें कि इसके लिए अदालत में एक विशेष पीठ का गठन किया गया था। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति श्याम चंडाक की यह विशेष पीठ दोषियों को दी गई मौत की सजा के खिलाफ दायर की गई याचिका की भी सुनवाई करेगी। आपको बता दें कि 11 जुलाई, 2006 को पश्चिम रेलवे की सात ट्रेनों में अलग-अलग स्थानों पर सात विस्फोट हुए। इसमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे।

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वर्ष 2015 में ट्रायल कोर्ट में दोषी ठहराए गए थे 12 लोग
इस मामले में सितंबर 2015 में ट्रायल कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से पांच को मौत की सजा सुनाई थी और सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि के लिए अपील की थी। ट्रायल कोर्ट की तरफ से मौत की सजा दिए जाने पर हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक है। अदालत में दोषियों ने दोषसिद्धि और अपनी सजा को चुनौती देने के लिए भी याचिकाएं दायर कीं हैं।  

‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी सुनवाई’
आपको बता दें कि वर्ष 2015 से लेकर अब तक 11 पीठों के समक्ष याचिकाएं आईं हैं लेकिन, इन पर सुनवाई नहीं हुई थी। पिछले ही सप्ताह बॉम्बे उच्च न्यायालय ने  इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ का गठन किया था। सोमवार को अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई प्रत्येक दिन सुबह के सत्र में होगी। अदालत ने यह निर्देश भी दिए कि दोषियों को शारीरिक रूप से अदालत में पेश नहीं किया जाएगा और उनकी जेलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई होगी। इससे पहले बचाव और अभियोजन पक्ष की तरफ से कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई अगले छह महीनों तक चल सकती है। 
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सरकारी वकील राजा ठाकरे ने क्या कहा?
अदालत में सरकारी वकील राजा ठाकरे ने अपनी दलीलों से मामले की शुरुआत की। उन्होंने विस्तार से अदालत को बताया कि धमाके के दिना क्या हुआ था। ठाकरे ने अदालत में कहा कि विस्फोट इतने भयानक थे कि ट्रेनों के परखच्चे उड़ गए थे। उन्होंने आगे कहा, ‘जिस जगह पर विस्फोट हुआ था, वहां शरीरों के टुकड़े पड़े हुए थे और हर जगह खून बिखरा हुआ था। चारों तरफ लोगों के बैग और सामान बिखरे पड़े थे।’ उधर, कुछ दोषियों की तरफ से अदालत में पेश हुईं वकील पायोशी रॉय ने कहा कि आरोपी मासूम हैं और उन्हें मामले में फंसाया गया है।

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