मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यूट्यूबर शंकर उर्फ सवुक्कू शंकर को गुंडा एक्ट के तहत हिरासत में लिए जाने के पुलिस कमिश्नर के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोयंबटूर जेल में बंद यूट्यूबर की अगर किसी अन्य केस में आवश्यकता नहीं है तो उनको तत्काल रिहा किया जाए। शंकर की मां कमला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 12 मई 2024 को जारी आदेश को आवश्यक आवश्यकता और सामग्री अधिनियम 1982 की धारा 4 के तहत रद्द कर दिया।
न्यायाधीश एसएम सुब्रमण्यम और वी शिवगणनम की खंडपीठ ने कहा कि यूट्यूबर के खिलाफ दोनों शिकायतें एक ही दिन सात मई 2024 को दर्ज की गईं थीं। एक शिकायत छह साल पुरानी थी और एक शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता की ओर से महिला पुलिसकर्मियों से गलत व्यवहार करने की है। दोनों ही शिकायतें अनावश्यक देरी और पुलिस की मनमानी कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े करती हैं।
कोर्ट ने कहा कि दोनों ही मामलों में कोई ठोस वजह नजर नहीं आती। हिरासत के मामले में कई विसंगितयां हैं। यदि पुलिस को कोई संदेह था तो उसे संदेह का समाधान हिरासत में लिए गए व्यक्ति से पूछताछ करके उसके पक्ष में करना था।
इससे पहले 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी यूट्यूबर शंकर को रिहा करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने भी कहा था कि मामले में जो देरी हुई है, उसमें याचिकाकर्ता का कोई हाथ नहीं है। वहीं विशेष तथ्यों को देखते हुए याचिकाकर्ता को तब तक रिहा किया जाना चाहिए जब तक कि हिरासत के खिलाफ मामला उच्च न्यायालय की तरफ से तय नहीं हो जाता। पीठ ने इस दौरान स्पष्ट किया कि उसका आदेश केवल निवारक हिरासत के मामलों से संबंधित है। पीठ ने इस दौरान साफ कि अगर याचिकाकर्ता किसी अन्य मामले में जेल में है, तो यह आदेश उस पर प्रभावी नहीं होगा।
12 मई को 'सवुक्कू' शंकर पर लगा था गुंडा एक्ट
ग्रेटर चेन्नई के पुलिस आयुक्त संदीप राय राठौर के आदेश के आधार पर साइबर अपराध (चेन्नई) पुलिस निरीक्षक की तरफ से 12 मई को गुंडा अधिनियम के तहत शंकर को हिरासत में लेने का आदेश दिया गया। चेन्नई पुलिस के प्रेस नोट के अनुसार चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा/साइबर अपराध में शंकर के खिलाफ सात मामले लंबित हैं। इनमें से तीन की जांच चल रही है। दो में आरोप पत्र दायर किए गए हैं और बाकी पर सुनवाई जारी है।
'सवुक्कू' शंकर को कोयंबटूर पुलिस ने 4 मई को दक्षिणी थेनी में एक यूट्यूब चैनल को दिए गए इंटरव्यू में महिला पुलिस कर्मियों/पुलिस अधिकारियों के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया था। बता दें कि गुंडा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को एक साल की कैद हो सकती है।