हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले बहुमत का श्रेय अब उस नेता को भी मिल रहा है, जिसके बारे में कहा गया कि उनकी सरकार की एंटी इनकम्बेंसी के चलते भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उस शख्स का नाम मनोहर लाल खट्टर है। प्रदेश की साढ़े नौ वर्ष तक कमान संभालने वाले खट्टर को लोकसभा चुनाव से पहले हटा दिया गया था। हालांकि उन्हें मोदी 3.0 मंत्रिमंडल में बड़े मंत्रालय सौंपे गए थे। हरियाणा के चुनाव में भाजपा द्वारा दलित समाज को साधने में खट्टर की रणनीति काम कर गई।
मतदान से पहले उन्होंने ही कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा का मुद्दा उठाया था। खट्टर ने शैलजा के भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं बाबत बयान दिया था। उन्होंने कहा था, राजनीति में संभावना तो सदा बनी रहती है। उनके इस इस बयान के बाद शैलजा भी सक्रिय हो गईं। उन्होंने उसी दिन मनोहर लाल के बयान का खंडन नहीं किया। दो या तीन दिन बाद शैलजा ने कहा, वे मरते दम तक कांग्रेस में रहेंगी, लेकिन तब तक भाजपा इस मुद्दे की मारक क्षमता तय कर चुकी थी। चुनाव प्रचार में इसे कैसे भुनाना है, रातोंरात इसका होमवर्क पूरा कर लिया गया।
शुरुआत, पीएम मोदी ने की। उसके बाद चुनाव प्रचार से लेकर वोटों की गिनती तक, शैलजा और दलित का मुद्दा, कांग्रेस पार्टी के लिए मुसीबत का सबब बना रहा। कांग्रेस पार्टी ने मतदान से 48 घंटे पहले अशोक तंवर की कांग्रेस में एंट्री के जरिए इस मुद्दे को काटना चाहा, मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी। पंद्रह बीस दिन पहले तक कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला बताया जा रहा था। कांग्रेस पार्टी का ग्राफ हाई जा रहा था।
पार्टी के स्टार प्रचारक एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा अपनी जनसभाओं में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिलने की बात कह रहे थे। तभी पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शैलजा का मुद्दा उठा दिया। उनका शैलजा के भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं बाबत दिया गया बयान, हिट हो गया। पार्टी ने बड़ी चतुराई के साथ इस बयान को लेकर अपने चुनाव प्रचार को धार दे दी। मामला, दलित से जुड़ गया।
इससे पहले शैलजा ने मुख्यमंत्री के पद को लेकर अपनी इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था, कोई दलित चेहरा, प्रदेश का सीएम क्यों नहीं बन सकता। भाजपा के लिए ये मुद्दा, रामबाण बन गया। खुद पीएम मोदी ने अपनी चुनावी रैली में कह दिया कि भाजपा ने वंचित और पिछड़े समाज को हरियाणा में आगे बढ़ाया है। भाजपा ने यह भी जोड़ दिया कि कांग्रेस की सत्ता आती है तो एक समुदाय विशेष का व्यक्ति ही मुख्यमंत्री बनेगा।
मोदी ने कहा, भाजपा ने ओबीसी वर्ग से आने वाले नायब सैनी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है। कांग्रेस ने दलितों, पिछड़ों, शोषितों के साथ धोखा किया है। अब कांग्रेस, इन जातियों का आरक्षण खत्म करना चाहती है। 2014 में जब हुड्डा, प्रदेश के सीएम हुआ करते थे, तब ऐसा कोई साल नहीं था, जब दलितों के साथ अन्याय नहीं हुआ। हर कोई जानता था कि दलितों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी, खाद-पानी देती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चुनाव प्रचार में शैलजा का मुद्दा उठा दिया। प्रदेश भाजपा के दूसरे नेताओं ने भी कहना शुरु कर दिया कि कांग्रेस पार्टी एक ही परिवार के व्यक्ति को सीएम बनाना चाहती है। अगर कांग्रेस की सत्ता आती है तो कमजोर वर्ग के व्यक्ति को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा। मौजूदा समय में हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में यह मैसेज दिया गया कि ये चुनाव हुड्डा और भाजपा के बीच है। कांग्रेस का मतलब हुड्डा है। भाजपा के इस प्रचार से कांग्रेस को कुछ नुकसान हुआ। एक तरफ भाजपा, गैर जाटों को अपनी ओर साधने में लगी थी तो दूसरी ओर 'हुड्डा बनाम भाजपा' के जरिए कांग्रेस को पीछे छोड़ने का फार्मूला तैयार कर दिया।
शैलजा से जब एक साक्षात्कार में पूछा गया कि क्या आप हुड्डा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करेंगी। शैलजा ने इस सवाल के जवाब में कहा था कि वे मुझे बुलाएंगे ही नहीं। चुनाव प्रचार के बीच उनका यह बयान एक बार फिर भाजपा के लिए फायदे का सौदा बन गया। पार्टी ने इसे खूब भुनाया। एक अन्य साक्षात्कार में शैलजा ने स्पष्ट तौर से यह कह दिया कि वे विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती थीं। पार्टी के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया से उनकी कोई बातचीत नहीं होती।
शैलजा और दलित, इस मुद्दे से बचाव के लिए कांग्रेस को कोई काट नहीं सूझ रही थी। पार्टी ने वोटिंग की दहलीज पर अशोक तंवर को कांग्रेस में शामिल कर लिया। इससे पार्टी को लगा कि उसने भाजपा की रणनीति पर पानी फेर दिया है। भाजपा को उसी की सोशल इंजीनियरिंग से घेर लिया है। अब भाजपा को यह कहने का मौका नहीं मिलेगा कि कांग्रेस में दलितों की नहीं सुनी जाती। हालांकि कांग्रेस को वोटिंग में इसका फायदा नहीं मिल सका।