हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन होने पर सहमति नहीं बन सकी। नतीजा, आम आदमी पार्टी ने सोमवार को हरियाणा विधानसभा चुनाव में अकेले ताल ठोक दी। पार्टी ने 29 उम्मीदवारों की दो सूची जारी कर दी है। 'आप' के प्रदेशाध्यक्ष सुशील गुप्ता ने कहा, हमारी अगली सूची जल्द आ रही है। पार्टी, सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है, हरियाणा में 'हुड्डा' ने सेफ गेम खेल दिया है। भले ही कांग्रेस के 'हाई कॉन्फिडेंस' का फायदा लेने से 'आम आदमी पार्टी' चूक गई है, लेकिन इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। यदि गठबंधन के तहत 'आप' के खाते में दस सीट भी जातीं, तो उसके चलते कांग्रेस में बगावत की संभावना बन सकती थी। वजह, सियासत के मौजूदा दौर में 'कांग्रेस' पार्टी, प्रदेश की अधिकांश सीटों पर मजबूत दिखाई पड़ रही है। कांग्रेस ने अभी तक 41 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। इनमें 28 मौजूदा विधायकों के नाम भी शामिल हैं।
आप के साथ गठबंधन के पक्ष में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के अलावा प्रदेश इकाई भी ज्यादा उत्साहित नहीं थी। कुल मिलाकर गठबंधन में 'आप' को पांच से ज्यादा सीटें नहीं मिल रही थीं। हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गत सप्ताह 67 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। जैसे ही सूची जारी हुई, भाजपा के पूर्व मंत्री एवं विधायक सहित कई नेता पार्टी से किनारा करने लगे। नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश इकाई ने नाराज हुए नेताओं को मनाने की पुरजोर कोशिश की है। अब ये तो नामांकन के दौरान ही पता चल सकेगा कि कितने नेता नाराज हैं और कितने मान गए हैं। यह आशंका जताई जा रही है कि नाराज नेता, किसी दूसरे दल के प्लेटफार्म पर या बतौर निर्दलीय उम्मीदवार, मैदान में उतर सकते हैं।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता 'हाई कॉन्फिडेंस' में हैं। पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए 2500 से अधिक नेताओं ने आवेदन दिया था। कई दिनों से आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठबंधन होने की खबरें चल रही थीं। पार्टी की राज्य इकाई, इस गठबंधन को लेकर खुश नहीं थी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में पार्टी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। पार्टी के इंटरनल सर्वे में भी यह बात सामने आ चुकी है। ऐसे में 'आप' के साथ गठबंधन करने का मतलब, कांग्रेस के 'हाई कॉन्फिडेंस' को कमजोर करना है। 'हाई कॉन्फिडेंस' के पीछे की मुख्य वजह, भाजपा के दस साल की एंटी-इनकम्बेंसी बताई जा रही है।
हरियाणा में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अजय यादव के मुताबिक, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को किसी दल के साथ गठबंधन करने की जरुरत नहीं है। कांग्रेस पार्टी, प्रदेश की हर सीट पर मजबूत स्थिति में है। यादव के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा भी इस गठबंधन के समर्थन में नहीं हैं। हुड्डा ने इस बाबत कांग्रेस हाईकमान को बता दिया था कि आप के साथ गठबंधन, कांग्रेस के हित में नहीं है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश स्तर के एक वरिष्ठ नेता, जिन्हें रोहतक लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिली है, वे बताते हैं, कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अगर गठबंधन को लेकर सख्त होता है तो 'आप' को पांच से कम सीटें ही दी जाएंगी।
प्रदेश में आज कांग्रेस 'हाई कॉन्फिडेंस' में है। पार्टी ने जिस तरह से उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उसे लेकर कोई विवाद या नाराजगी देखने को मिली। अनेक उम्मीदवार ऐसे हैं, जो पूर्व में मंत्री या विधायक रह चुके हैं। हुड्डा ने इस मामले में सेफ गेम खेला है। दो दशक से हुड्डा के साथी रहे अधिकांश नेताओं को टिकट दिया गया है।
कांग्रेस हाईकमान ने इस संबंध में प्रदेश इकाई के नेताओं से पूछा था कि 'आप' से गठबंधन किया जाए या नहीं। इसे लेकर सभी नेताओं ने एक स्वर में आप के साथ गठबंधन न करने की सलाह दी थी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दस में से 'आप' को एक सीट दी थी। उस सीट पर आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा विधानसभा में अभी तक 'आप' का खाता नहीं खुल सका है। ऐसे में 'आप', कम से कम दस सीटों की मांग कर रही थी। यहां पर भी कांग्रेस के लिए एक बड़ा रिस्क था।
विधानसभा चुनाव में बहुत थोड़े अंतर से हार जीत होती है। कांग्रेस के जिन नेताओं की सीट पर 'आप' उम्मीदवार उतारे जाते, वहां बगावत संभव हो सकती थी। प्रदेश की राजनीति के जानकार रविंद्र कुमार के मुताबिक, चुनाव में कांग्रेस पार्टी मजबूत स्थिति में है।
अगर गठबंधन की घोषणा होती है, तो यह अलायंस, कांग्रेस पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। पांच साल से चुनाव की तैयारी में जुटे वे नेता बगावत कर सकते हैं, जिनकी टिकट कटेगी। इससे पहले इन दोनों दलों का गठबंधन नहीं हुआ है। ऐसे में यह भी पक्का नहीं कहा जा सकता कि दोनों पार्टियों के वोट, शिफ्ट होंगे या नहीं। हरियाणा में फिलहाल आप का खास वजूद नहीं है। हालांकि पार्टी ने कई जिलों में अपना संगठन खड़ा किया है। ऐसे में कांग्रेस से गठबंधन कर 'आप' को दो चार सीट भी मिल जाती, तो वह उसके लिए एक बड़ी जीत होगी। दूसरी ओर, इस गठबंधन से कांग्रेस को कुछ फायदा नहीं होगा। प्रदेश की इकाई ने कांग्रेस नेतृत्व को इस बात से अवगत करा दिया था कि आने वाले समय में आप, कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगाएगी। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह गठबंधन किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है।
कांग्रेस के एक अन्य नेता ने बताया, दिल्ली में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर हरियाणा में आप के साथ गठबंधन की बात आगे बढ़ी थी। इस बीच दिल्ली के नेताओं से भी बात की गई। उनका कहना था कि इस बार दिल्ली के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मजबूती से लड़ेगी। उसे गठबंधन की जरुरत नहीं पड़ेगी। अभी दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है। अब हरियाणा में अगर आप के साथ कांग्रेस का गठबंधन नहीं होता है, तो दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भी गठबंधन की संभावना खत्म हो सकती है।