सूत्रों के मुताबिक, जजपा ने लोकसभा चुनाव में दो सीट मांगी थीं। भाजपा ने एक भी सीट देने से मना कर दिया। भाजपा अपने दम पर प्रदेश की सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सूत्रों ने बताया है कि भाजपा हाईकमान, लोकसभा चुनाव ही दहलीज पर सीएम मनोहर लाल खट्टर को बदलने का जोखिम नहीं उठाएगी। अगर दोबारा से सरकार का गठन होता है, तो उस स्थिति में खट्टर की मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। जजपा के साथ भाजपा का गठबंधन टूटना, इसके पीछे जाट और गैर जाट वोट बैंक बताया जा रहा है।
भाजपा, गैर जाटों के वोटों के आधार पर सत्ता में आई थी। मौजूदा हालात में जाट वोट बैंक, पूरे तरीके से कांग्रेस के साथ जाता हुआ नजर आ रहा था। ऐसे में अगर जजपा और भाजपा का गठबंधन रहता है, तो जाट वोट बैंक में सेंध लगना मुश्किल था। इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता था। प्रदेश में जाट वोटर, भाजपा से नाराज चल रहे हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है। अगर भाजपा, अपने दम पर चुनाव लड़ती है, तो उसे गैर जाटों का बड़ा समर्थन हासिल हो सकता है। दूसरी तरफ जाट वोटर, कांग्रेस, जजपा और इनेलो में विभाजित हो जाएंगे। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। यही वजह है कि अब लोकसभा चुनाव की दहलीज पर भाजपा ने जजपा से गठबंधन तोड़ने की बात कही है।