यदि लोकसभा चुनाव के यही आंकड़े अक्तूबर माह में होने वाले विधानसभा चुनाव में ट्रांसफर हुए, तो भाजपा को सत्ता से बेदखल होना पड़ सकता है। पिछले चुनावों में ही भाजपा को दुष्यंत चौटाला की पतवार मिल गई थी, जिसके सहारे उसकी नैया पार हो गई थी। लेकिन इस बार दुष्यंत चौटाला को कितनी सफलता मिलेगी, इस पर कयास लगाए जा रहे हैं।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि भाजपा से गठबंधन का नुकसान चौटाला को भी उठाना पड़ेगा। जाटों-किसानों की भाजपा से नाराजगी की आंधी में चौटाला का किला भी ढह सकता है और यदि ऐसा हुआ तो चुनाव के बाद बनने वाले समीकरणों में भी भाजपा को झटका लग सकता है। यही कारण है कि अब भाजपा ने अपना किला बचाने के लिए नई रणनीति के साथ अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। किरण चौधरी और श्रुति चौधरी भाजपा के इसी मिशन में सहयोग करेंगी।
तीन महीने में क्या करेगी भाजपा
अक्तूबर में हरियाणा में विधानसभा चुनाव होंगे। पार्टी के पास केवल जुलाई, अगस्त और सितंबर यानी तीन महीने का ही समय बचा हुआ है। इस दौरान पार्टी को न केवल लोकसभा चुनाव के झटकों से उबरते हुए राज्य के सामाजिक-जातीय समीकरणों को साधना है, बल्कि उसे उन नाराज वर्गों को भी अपने पाले में लेना है, जो उससे कथित तौर पर नाराज बताए जा रहे हैं। भाजपा की इस रणनीति में किरण चौधरी और श्रुति चौधरी जैसी नेता समाज के अलग-अलग वर्गों को भाजपा के करीब लाने में मदद कर सकती हैं।
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी भी हरियाणा में जोरदार कोशिश कर सकती है। वह दिल्ली की तरह यहां भी मुफ्त योजनाओं की बड़ी घोषणाएं कर भाजपा-कांग्रेस का खेल बिगाड़ने की कोशिश कर सकती है। खुद कांग्रेस भी इस रणनीति को हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में अपना चुकी है। वह हरियाणा में भी इसका प्रयोग करने की कोशिश करेगी।
भाजपा विपक्ष की रणनीति के प्रति पूरी तरह सतर्क है। सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार इन बचे तीन महीनों में किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष योजनाओं की शुरुआत कर इनको अपने साथ लाने की कोशिश की जा सकती है। हरियाणा सरकार पहले ही महिलाओं के लिए बस यात्रा मुफ्त करने की घोषणा कर चुकी है। इसी प्रकार की अन्य योजनाओं को लाकर जनता को लुभाने की कोशिश की जा सकती है।