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Haryana: 2.71 लाख कर्मी, डेढ़ लाख पेंशनर व 15 लाख परिजन, कांग्रेस का वादा OPS तो भाजपा करेगी सख्ती

सार

Haryana: कांग्रेस पार्टी ने भले ही लोकसभा चुनाव में ओपीएस बहाली को अपने घोषणा पत्र में जगह नहीं दी थी, लेकिन अब हरियाणा के चुनाव में पुरानी पेंशन को प्रमुख गारंटी में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार ने ओपीएस और एनपीएस के स्थान पर यूपीएस लागू की घोषणा की है।
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हरियाणा में किसे लगेगी ओपीएस की चोट? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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हरियाणा के विधानसभा चुनाव में 'पुरानी पेंशन' भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रदेश में दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस, इस मुद्दे पर अलग मत रखते हैं। बुधवार को कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 'पुरानी पेंशन' देने की घोषणा की है। दूसरी तरफ भाजपा की राज्य इकाई और विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार, ओपीएस को लेकर असमंजस में हैं। जब उनसे ओपीएस बाबत पूछा जाता है तो केंद्र सरकार का मामला कह कर वे अपना पिंड छुड़ाते हुए दिखते हैं। इतना ही नहीं, पिछले दिनों मुख्यमंत्री नायब सैनी का एक बयान भी खूब चर्चा में है। उन्होंने सरकारी कर्मियों को लेकर कहा था कि सरकार बनने के बाद हरियाणा के अधिकारियों व कर्मचारियों की चूड़ी टाइट करने का काम करेंगे। 
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बता दें कि प्रदेश में सरकारी कर्मचारी, लंबे समय से 'पुरानी पेंशन' बहाली के लिए आंदोलन कर रहे हैं। हरियाणा की राजधानी के अलावा जिला स्तर पर भी कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया है। पेंशन बहाली संघर्ष समिति के राज्य प्रधान विजेंद्र धारीवाल, लगातार इस मुद्दे पर मुखर हैं। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारी, भाजपा को वोट नहीं देगा। प्रदेश के सरकारी कर्मियों के बीच, ओपीएस एक बड़ा मुद्दा है। जो लोग यह सोचते हैं कि कर्मचारियों की छोटी संख्या, चुनाव में क्या नुकसान पहुंचाएगी, उन्हें चुनावी नतीजों के बाद कर्मियों की ताकत का अहसास होगा। 

हरियाणा में लगभग 2.71 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। इसके अलावा 1.55 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं। अगर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर के परिवारों को मिलाएं तो यह संख्या करीब 15 लाख के आसपास पहुंच जाती है। 
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विधानसभा चुनाव, जहां पर हार जीत का अंतर हजारों में ही होता है, वहां कर्मचारियों और उनके परिजनों की यह संख्या मायने रखती है। कांग्रेस पार्टी ने भले ही लोकसभा चुनाव में ओपीएस बहाली को अपने घोषणा पत्र में जगह नहीं दी थी, लेकिन अब हरियाणा के चुनाव में पुरानी पेंशन को प्रमुख गारंटी में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार ने ओपीएस और एनपीएस के स्थान पर यूपीएस लागू की घोषणा की है। हरियाणा में 14 सितंबर को कुरुक्षेत्र में आयोजित एक चुनावी जनसभा में खुद पीएम मोदी ने ओपीएस को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, कर्मचारियों की हितैषी भाजपा सरकार 'नई पेंशन स्कीम' लेकर आई है। इसमें कर्मचारियों के लिए निश्चित पेंशन की गारंटी है। इस नई पेंशन स्कीम 'यूपीएस' का व्यापक स्वागत हुआ है। सरकारी कर्मचारियों ने इस पर खुशी जताई है। 



पेंशन बहाली संघर्ष समिति के राज्य प्रधान विजेंद्र धारीवाल कहते हैं, केंद्र सरकार ने यूपीएस के जो लाभ गिनाएं हैं, उन्हें तो कर्मचारियों ने रिजेक्ट कर दिया है। कर्मचारियों ने जो आंदोलन किया है, वह एनपीएस में सुधार या यूपीएस के लिए नहीं किया है। उनका केवल एक ही मकसद है कि पुरानी पेंशन बहाल की जाए। विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों ने विभिन्न तरीकों से सरकार का विरोध किया है। पिछले दिनों धारीवाल और उनके साथी पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा से मिले थे। उन्होंने वादा किया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता आने पर ओपीएस लागू की जाएगी। लोकसभा चुनाव में ओपीएस को भाजपा ने कम आंका था। नतीजा, उसे दस में से पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। कर्मचारियों को गुमराह करने के लिए केंद्र सरकार यूपीएस लेकर आई है। 

धारीवाल ने कहा, प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी, सरकारी कर्मचारियों को धमकाने का काम कर रहे हैं। पिछले दिनों सैनी की ओर से अधिकारियों और कर्मचारियों की चूड़ी टाइट करने का बयान दिया गया था। इससे पहले लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कर्मचारियों पर फर्जी वोटिंग का आरोप लगाया था। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन ने राज्य प्रधान सतपाल सिंधू ने कहा, लोकतंत्र में मुख्यमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति के मुख से ऐसे बयान शोभा नहीं देते। मुख्यमंत्री को अपने बयान के लिए माफी मांंगनी चाहिए। धारीवाल के मुताबिक, कर्मचारियों ने पहले भी कहा था कि जो भी पार्टी अपने चुनावी घोषणा पत्र में ओपीएस बहाली का वादा करेगी, उसे वोट मिलेगा। अब कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में ओपीएस बहाली का वादा कर दिया है।
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