भारत में लड़ाकू विमान के विनिर्माण की संभावनाओं पर लगातार मंथन हो रहा है। स्वदेशी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के चेयरमैन सीबी अनंतकृष्णन ने बताया कि एचएएल लड़ाकू विमान तैयार करने की क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रही है। उन्होंने हाल ही में पीएम मोदी के दौरे पर भी प्रतिक्रिया दी। अनंतकृष्णन के अनुसार बंगलूरू में एचएएल के केंद्र का दौरा करने पहुंचे प्रधानमंत्री ने इंजीनियरों के प्रयासों की सराहना की।
हल्के लड़ाकू विमान यानी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस में पीएम मोदी की उड़ान पर एचएएल चीफ सीबी अनंतकृष्णन ने कहा, एचएएल में प्रधानमंत्री की मौजूदगी प्रेरित करने वाली है। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स में हो रहे कामकाज से पीएम मोदी काफी संतुष्ट और खुश दिखे। अनंतकृष्णन ने कहा कि एचएएल के हैंगर का दौरा करने के बाद पीएम मोदी ने यहां काम करने वाले इंजीनियरों के प्रयासों की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, जब प्रधानमंत्री एचएएल के उत्पादों की सराहना करते हैं, तो इससे वास्तव में प्रेरणा मिलती है।
एक साल में एचएएल कितने हल्के लड़ाकू विमान तैयार कर सकता है? इस सवाल पर एचएएल के अध्यक्ष ने कहा, वर्तमान में एचएएल की क्षमता 16 विमान तैयार करने की है। कंपनी अपनी क्षमता को 24 विमान तक बढ़ाना चाहती है। एचएएल प्रमुख ने बताया कि क्षमता बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के नासिक में तीसरी लाइन स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।
एचएएल प्रमुख ने कहा, उत्पादन के लिए कुल मिलाकर, तीन स्वतंत्र लाइनें होंगी। हर लाइन पर 8 विमानों का उत्पादन किया जाएगा। 2025-26 से उत्पादन शुरू होने का अनुमान है। इसके बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एक साल में औसतन 24 विमान तैयार और वितरित करने में सक्षम बन जाएगी। एचएएल प्रमुख अनंतकृष्णन के अनुसार, एचएएल तय समय से एक साल पहले 83 एलसीए तेजस मार्क 1ए विमान के ऑर्डर को पूरा कर लेगा, उन्हें इस बात का पूरा भरोसा है।
पीएम मोदी के एचएएल यूनिट दौरे पर अनंतकृष्णन ने बताया कि प्रधानमंत्री को एलसीए मार्क 1ए की निर्माण प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया, एचएएल के अधिकारियों ने पीएम मोदी को इस विमान में लगे स्वदेशी इंजन के बारे में भी विस्तार से बताया। एचएएल प्रमुख के अनुसार, प्रधानमंत्री को स्वदेश में डिजाइन किए गए अलग-अलग हेलीकॉप्टर भी दिखाए गए। पीएम मोदी को एएलएच रुद्र का हथियारयुक्त संस्करण भी दिखाया गया।
क्या हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने में उद्योग जगत के साथ साझेदारी करनी चाहिए? इस सवाल पर एचएएल अध्यक्ष सीबी अनंतकृष्णन ने कहा, छठी पीढ़ी की अवधारणा और इसके लिए जरूरी क्षमताओं पर कोई स्पष्ट तथ्य मौजूद नहीं हैं। यह अभी भी विकसित होने की प्रक्रिया में है। इसके बावजूद एचएएल में विकास और नवाचार की प्रक्रिया लगातार जारी है।
उन्होंने कहा, एक बार छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान से जुड़ी अवधारणा पर स्पष्टता मिल जाए उसके बाद एचएएल निजी उद्योग के साथ जुड़ने के तरीकों पर विचार करेगा। तमाम पहलू और विमान विनिर्माण से जुड़ी बातें स्पष्ट होने के बाद ही साझेदारी का कोई फैसला लिया जाएगा। एचएएल प्रमुख अनंतकृष्णन के मुताबिक एलसीए मार्क वन-ए और मार्क टू की विकास प्रक्रिया में एचएएल निजी उद्योगों को भी शामिल कर रहा है।
उन्होंने साफ किया कि उत्पादन की प्रक्रिया में भी एचएएल इन्हें शामिल करने की योजना बना रहा है। हालांकि, यह काफी बड़ा फैसला है और अभी इसमें लंबा रास्ता तय किया जाना है। उन्होंने कहा, एचएएल एलसीए मार्क वन ए के लिए निजी उद्योगों की मदद से स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल स्वदेशी का इस्तेमाल केवल 55 फीसदी है, जिसे 70 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।