बताया जा रहा है कि सिस्टम में हवा से हवा और हवा से जमीन पर लक्ष्य ट्रैकिंग और स्थानीयकरण के लिए सिंगल विंडो में टेलीविजन डे कैमरा, इन्फ्रारेड और लेजर सेंसर जैसी विशेषताएं होंगी। यह प्रणाली भारतीय वायु सेना की वायु श्रेष्ठता को बढ़ाएगी।
एचएएल और बीईएल ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) की मेक-II प्रक्रिया के तहत मंगलवार को बेंगलुरु में सुकोई लड़ाकू विमान के लिए लॉन्ग-रेंज डुअल बैंड इंफ्रा-रेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम (IRST) के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। यह अनुबंध मेक इन इंडिया के हिस्से के रूप में काम करेगा।
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जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित आईआरएसटी प्रणाली रक्षा उड्डयन के क्षेत्र में एक उच्च स्तरीय रणनीतिक प्रौद्योगिकी उत्पाद होगी और वैश्विक बाजार में मौजूदा आईआरएसटी प्रणाली के लिए तकनीकी रूप से प्रतिस्पर्धी होगी।
बताया जा रहा है कि सिस्टम में हवा से हवा और हवा से जमीन पर लक्ष्य ट्रैकिंग और स्थानीयकरण के लिए सिंगल विंडो में टेलीविजन डे कैमरा, इन्फ्रारेड और लेजर सेंसर जैसी विशेषताएं होंगी। यह प्रणाली भारतीय वायु सेना की वायु श्रेष्ठता को बढ़ाएगी। प्रौद्योगिकी के लिहाज से महत्वपूर्ण आईआरएसटी प्रणाली के विकास के लिए रक्षा क्षेत्र के दो सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के साथ आने से इस क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना को गति मिलेगी।