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Seat Ka Samikaran: कभी कांग्रेस के मुख्यमंत्री की सीट रही हाजीपुर, पिछले सात चुनाव से है भाजपा का अभेद्य किला

Sat, 19 Jul 2025 07:18 AM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार चुनाव से जुड़ी से खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज हाजीपुर विधानसभा सीट की बात। यहां से कांग्रेस के दीप नारायण सिन्हा 17 दिनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री चुने गए थे। 2000 के बाद से यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। 
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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीट के समीकरण की 21वीं कड़ी में आज बात हाजीपुर सीट की। इस सीट से बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री दीप नारायण सिंह भी विधायक रहे थे। साल से हाजीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय यहां से लगातार चार बार जीते। वहीं, पिछले तीन चुनाव से भाजपा के अवधेश सिंह हाजीपुर का प्रतिनिधत्व कर रहे हैं।  
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पहले जानते हैं हाजीपुर सीट के बारे में 
बिहार के 38 जिलों में से एक वैशाली जिला है। इस जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, महुआ, राजा पाकर (एससी), राघोपुर, महनार और पातेपुर (एससी) विधानसभा सीट शामिल है। इस सीट पर 1951 में पहली बार चुनाव हुए थे। 

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कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
1951 में हाजीपुर सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में यहां से कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के सरयुग प्रसाद ने निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद सिन्हा को 484 वोट से हराया था। 1957 और 1962 में भी हाजीपुर सीट पर कांग्रेस को जीत मिली। दोनों बार कांग्रेस के दीप नारायण सिंह यहां से जीते।  1957 में उन्होंने निर्दलीय अमीर सिंह को 7,264 वोट से हराया। 1961 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के निधन के बाद दीप नारायण सिंह 17 दिन के लिए बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। बाद में उनकी जगह बिनोदानंद झा राज्य की कमान सौंपी गई। झा के नेतृत्व में ही कांग्रेस ने 1962 का चुनाव लड़ा। 1962 के चुनाव में भी कांग्रेस के दीपनरायन सिन्हा को हाजीपुर सीट से जीत मिली। उन्होंने भाकपा के किशोरी प्रसन्न सिन्हा को 1367 वोट से हरा दिया था। 

1967: भाकपा को मिली जीत 
1967 के विधानसभा चुनाव में  हाजीपुर से भाकपा को जीत मिली। भाकपा के केपी सिंह ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एमएस कामन को 7387 वोट से हरा दिया था। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के एसएन साहू रहे।  1969 में हाजीपुर से शोषित दल के मोतीलाल सिन्हा कानन को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के रामबाबू सिंह को 14,576 वोट से हराया। 1972 में भी मोतीलाल सिन्हा कानन जीते। इस बार सिन्हा संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। उन्होंने कांग्रेस के गोपीनाथ पटेल को 24,505 वोट से हरा दिया। 

 

1977: जगन्नाथ प्रसाद यादव को मिली जीत
1977 में मोती लाल सिन्हा कानन को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में जेएनपी जगन्नाथ यादव ने
कांग्रेस क मोती लाल सिन्हा कानन को 26238 वोट से हरा दिया था। 1980 में जगन्नाथ राय को जीत मिली। कांग्रेस (आई) के जगन्नाथ राय ने कांग्रेस (यू) के बासकित राय को 1239 वोट से हरा दिया था। 

 

1985: मोती लाल सिन्हा कानन को मिली तीसरी जीते
1985 में एक बार फिर दो चुनाव हारने के बाद मोतीलाल को जीत मिली। मुकाबला जगन्नाथ प्रसाद राय के साथ ही था, जो पिछले चुनाव में जीते थे। इस बार मोतीलाल कानन ने लोक दल से चुनाव लड़ा था। उन्होंने कांग्रेस के जगन्नाथ प्रसाद राय को 18197 वोट से हरा दिया था। 

1990: जगन्नाथ का जगन्नाथ से हुआ मुकाबला
1990 के विधानसभा चुनाव में हाजीपुर सीट पर दो जगन्नाथ के बीच मुकाबला हुआ। जीत जगन्नाथ राय को मिली। कांग्रेस के जगन्नाथ राय ने निर्दलीय उम्मीदवार जगन्नाथ यादव को 13,240 वोट से हरा दिया था। इस चुनाव में भाजपा के नित्यानंद राय तीसरे स्थान पर थे। 

 

1995: जनता दल के  राजेंद्र राय को मिली जीत
1995 में मुकाबला जनता दल और भाजपा में था। जनता दल के राजेंद्र राय ने भाजपा के नित्यानंद राय को 25,867 वोट से हरा दिया था। 

 

2000 के बाद भाजपा का गढ़ बनी सीट
साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में हाजीपुर सीट से भाजपा के नित्यानंद राय जीते। तब से अब तक इस सीट पर भाजपा नहीं हारी है। भाजपा के नित्यानंद राय लगातार चार बार यहां से जीते। 2000 में उन्होंने राजद के राजेंद्र राय को 52,836 वोट से हरा दिया।  2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। दोनों ही चुनावों में नित्यानंद राय को जीत मिली। पहले चुनाव में नित्यानंद राय ने लोक जनशक्ति पार्टी के राजेंद्र राय को 28,936 वोट से हराया। अक्तूबर में हुए दूसरे चुनाव में फिर एक बार मुकाबला नित्यानंद राय और राजेंद्र राय के बीच में ही हुआ। इस बार भाजपा के नित्यानंद राय ने राजद के राजेंद्र राय को 15,258 वोट से हरा दिया। 

2010 के चुनाव में भी नित्यानंद राय को ही हाजीपुर से जीत मिली। मुकाबला फिर से नित्यानंद राय और राजेंद्र राय के बीच में ही था। भाजपा के नित्यानंद राय ने लोक जनशक्ति पार्टी के राजेंद्र राय को 16,609 वोट से हरा दिया था। 

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2014 के उपचुनाव में अवधेश सिंह को मिली जीत

2014 में भाजपा के टिकट पर नित्यानंद राय लोकसभा पहुंच गए। वह उजियारपुर लोकसभा सीट से जीते। जीते के बाद नित्यानंद राय ने यह सीट खाली कर दी। इसके बाद हाजीपुर विधानसभा सीट पर 2014 में उपचुनाव कराना पड़ा। इस उपचुनाव में फिर से भाजपा के उम्मीदवार को ही जीत मिली। भाजपा के अवधेश सिंह ने यहां से जीत दर्ज की थी। अवधेश इसके बाद 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में भी हाजीपुर सीट से विधानसभा पहुंचे। 

2015 में भाजपा के अवधेश सिंह ने कांग्रेस के जगन्नाथ प्रसाद राय को 12,195 वोट से हरा दिया था। 2020 में मुकाबला भाजपा और राजद के बीच था। भाजपा के अवधेश सिंह ने राजद के देव कुमार चौरसिया को 2,990 वोट से हराया।
 

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