मुंबई में स्थित हाजी अली दरगाह
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हाजी अली दरगाह ट्रस्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह महिलाओं को भी पुरुषों की तरह दरगाह में प्रवेश देने के लिए तैयार है। इसके साथ ही ट्रस्ट ने जरूरी आधारभूत बदलाव करने के लिए कोर्ट से चार हफ्ते का वक्त मांगा। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने ट्रस्ट को इसकी इजाजत देते हुए बांबे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट ने महिलाओं को भी पुरुषों के समान दरगाह में प्रवेश देने का आदेश दिया था। दरगाह ट्रस्ट ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
दरगाह ट्रस्ट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मणयम ने पीठ के समक्ष कहा कि ट्रस्ट ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर बताया है कि वह महिलाओं को दरगाह के भीतर प्रवेश की अनुमति देने को तैयार है।
मालूम हो कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम उम्मीद करते हैं कि हाजी अली दरगाह ट्रस्ट प्रगतिशील रुख अपनाएगा। कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी एक बिंदु तक पुरुष और महिलाओं दोनों को जाने की इजाजत नहीं दी जाती है तो कोई परेशानी नहीं है, लेकिन किसी एक को इजाजत दी जाती है तो परेशानी है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने दरगाह में महिलाओं के प्रवेश का आदेश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने का समय देते हुए आदेश को प्रभावी बनाने पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्तूबर को इस रोक को आगे बढ़ा दिया था।