समझिए एच-1बी वीजा की असली लागत क्या है?
अभी तक एच-1बी वीजा की बेस फीस केवल $460 से $780 (₹38,000–₹65,000) थी, लेकिन इसके साथ जुड़ी अन्य फीस से एक बड़ी कंपनी को एक वीजा के लिए करीब $10,185 (₹8.4 लाख) तक खर्च करना पड़ता है।
अभी तक एच-1बी वीजा की बेस फीस $460 से $780 (₹38,000 से ₹65,000) के बीच थी, लेकिन इसके साथ जुड़ी अतिरिक्त फीस के कारण एक बड़ी कंपनी को एक वीजा पर कुल मिलाकर लगभग $10,185 (करीब ₹8.4 लाख रुपये) तक खर्च करना पड़ता है। इस खर्च में कई तरह की फीस शामिल होती हैं, जैसे कि अमेरिकी वर्कफोर्स की ट्रेनिंग के लिए $1500 (लगभग 1.33 लाख रुपये) तक की फीस ली जाती है। सीमा सुरक्षा (बॉर्डर प्रोटेक्शन रुपये) के नाम पर कंपनियों से $4000(3.50 लाख रुपये) वसूले जाते हैं।
इसके अलावा शरणार्थी कार्यक्रम के लिए भी $600 (53 हजार रुपये) तक की अतिरिक्त राशि देनी पड़ती है। धोखाधड़ी रोकने के लिए $500 (44 हजार रुपये) की अलग से फीस लगती है। साथ ही अगर कोई कंपनी जल्द प्रोसेस करवाना चाहती है, तो उसे प्रीमियम प्रोसेसिंग के लिए $2805 चुकाने होते हैं। इन सभी शुल्कों को जोड़ने पर एक वीजा पर खर्च $10,000 (8.8 लाख रुपये) से अधिक हो जाता है और अगर किसी कर्मचारी का वीजा ट्रांसफर होता है तो ये फीस दोबारा देनी पड़ती है।
इसके बाद कंपनियों को हर साल एच-1बी कर्मचारी की सैलरी पर करीब $20,000 (₹16.5 लाख) तक सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर और बेरोजगारी बीमा में देना होता है, जिसका लाभ इन कर्मचारियों को नहीं मिलता, क्योंकि नौकरी जाने पर उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ता है।
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पीएम मोदी पहले ही कर चुके है भारत लौटने की अपील
ऐसे में अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही अपील कर चुके हैं कि वे भारत लौटें और देश के टेक सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करें। हालांकि ऐसा करना आसान नहीं होगा, इसके लिए सरकार और कंपनियों दोनों को अपनी सोच और काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव लाना होगा।
ये भी समझिए क्यों नहीं इतना आसान?
गौरतलब है कि अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स को वहां के आधुनिक वर्क कल्चर की आदत हो गई है, जो फिलहाल भारत में पूरी तरह नहीं मिल पाता। ऐसे में अगर उन्हें वापस लाना है, तो भारत को भी उन जैसी सुविधाएं और माहौल देना होगा। साथ ही अगर भारत की सरकार और टेक कंपनियां तेजी से बदलाव करें और अमेरिकी कंपनियां भारतीय टैलेंट पर भरोसा बनाए रखें, चाहे वो दूर से ही क्यों न काम कर रहे हों, तो यह पल भारत के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है।
विशेषज्ञों की माने तो एक पक्ष की चिंता अपनी जगह है, लेकिन अगर आने वाले 5 से 10 वर्षों की बात करें, तो भारत के पास अपनी टेक इंडस्ट्री को नए सिरे से खड़ा करने का सुनहरा अवसर है। बस ज़रूरत है सही दिशा में ठोस कदम उठाने की।