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ED: अवैध सरोगेसी रैकेट, 30 लाख में बच्चा; डीएनए से पता चला कि बच्चा जैविक नहीं तो फिर कहां से आते थे नवजात?

Fri, 26 Sep 2025 07:52 PM IST
शुभम कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

ईडी ने हैदराबाद, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में अवैध सरोगेसी रैकेट के खिलाफ नौ स्थानों पर छापेमारी की। डॉ नम्रता द्वारा चलाए जा रहे इस रैकेट में 30 लाख में बच्चा बेचा जाता था, जो जैविक नहीं होता। गरीब महिलाओं को लालच देकर बच्चों की तस्करी की जाती थी।

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ईडी की कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने 25 सितंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत हैदराबाद, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में नौ स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर के नाम पर डॉ. पचीपल्ली नम्रता उर्फ अथलूरी नम्रता द्वारा चलाए जा रहे अवैध सरोगेसी रैकेट के संबंध में की गई। तलाशी के परिणामस्वरूप रैकेट से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए, जिनमें डॉ. पचीपल्ली नम्रता उर्फ अथलूरी नम्रता द्वारा धोखाधड़ी किए गए जोड़ों का विवरण और उनके कब्जे वाली संपत्तियां शामिल हैं।

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अवैध सरोगेसी रैकेट के तहत 30 लाख रुपये में बच्चा मिलता था। जब डीएनए रिपोर्ट आती थी तो पता चलता कि बच्चा जैविक नहीं है। जांच में मालूम हुआ कि गरीब, कमजोर और गर्भवती महिलाओं को पैसे का लालच देकर जन्म के तुरंत बाद बच्चा ले लेते थे। एक मामले में जब डीएनए परीक्षण में यह पुष्टि हो गई कि बच्चा उनका जैविक बच्चा नहीं था, तो बच्चे का विदेशी पासपोर्ट अस्वीकार कर दिया गया। 

ईडी की कार्रवाई
ईडी ने धोखाधड़ी, ठगी, आपराधिक षड्यंत्र, अवैध सरोगेसी और बाल तस्करी के लिए हैदराबाद के गोपालपुरम पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। डॉ. पचीपल्ली नम्रता उर्फ अथलुरी नम्रता (यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर) एक सरोगेसी रैकेट के आधार पर निःसंतान दंपतियों को बच्चा मुहैया करा रही थीं। वे अपने कर्मचारियों और एजेंटों के साथ मिलकर अपने क्लिनिक के माध्यम से इस रैकेट को संचालित कर रही थीं।
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कैसे देते थे वारदात को अंजाम?
निःसंतान दंपतियों को आईवीएफ के बजाय सरोगेसी विधि चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। पुलिस में दर्ज प्रारंभिक शिकायत में यह पता चला कि सरोगेसी विधि के माध्यम से बच्चे का विकल्प चुनने वाले दंपति को सरोगेसी के माध्यम से अपने स्वयं के अंडाणु और शुक्राणु का उपयोग करके भ्रूण बनाने का वादा किया गया था। निःसंतान दंपतियों को कहा गया कि इसे जांचने के बाद क्लिनिक द्वारा व्यवस्थित सरोगेट मां में प्रत्यारोपित किया जाएगा। 

यह मामला 30 लाख रुपये में तय होता था। इसमें से 15 लाख रुपये चेक के माध्यम से और 15 लाख रुपये नकद सरोगेट को दिए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद, दंपति को एक लड़का सौंप दिया गया। हालांकि, डीएनए सत्यापन से पुष्टि हुई कि बच्चा उनका जैविक बच्चा नहीं था। इस रैकेट में कई एजेंट भी शामिल पाए गए, जो गरीब, कमजोर और गर्भवती महिलाओं को पैसे का लालच देकर जन्म के तुरंत बाद उनका बच्चा ले लेते थे।

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ईडी के जांच में कौन सी बात आई सामने?
ईडी की जांच से पता चला है कि डॉ. नम्रता ने कई दम्पतियों को उपरोक्त तरीके से ठगा और उनसे चेक व नकद के माध्यम से भारी रकम वसूली। इस रकम का एक हिस्सा उन सरोगेट्स/महिलाओं को दिया गया जिन्होंने अपने बच्चे दिए और इस प्रक्रिया में मदद करने वाले एजेंटों को कमीशन मिला। जांच एजेंसी के मुताबिक, अपराध की अधिकांश राशि डॉ. नम्रता ने अपने पास रख ली और उसका इस्तेमाल उन्होंने संपत्ति अर्जित करने सहित निजी उद्देश्यों के लिए किया।

कई अहम दस्तावेज जब्त
ईडी द्वारा की गई तलाशी में कई अहम दस्तावेजों को जब्त किया गया है। इनकी जांच से पता चला है कि वह हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, नेल्लोर, कोलकाता आदि में विभिन्न केंद्रों में देश भर के जोड़ों को ऐसी सेवाएं दे रही थी। जब्त दस्तावेजों से यह भी पता चला कि डॉ. नम्रता 10 वर्षों से अधिक समय से इन गतिविधियों में शामिल थी। उसने यह दिखाने के लिए सरोगेसी समझौतों के रूप में कानूनी दस्तावेज तैयार किए कि निःसंतान जोड़े और वाहक (सरोगेट) ने खुद उससे संपर्क किया और वह सिर्फ सरोगेसी सेवाएं प्रदान कर रही थी।

जब्त दस्तावेजों से यह भी पता चला कि एक मामले में, विदेशी पासपोर्ट रखने वाले माता-पिता को पता चला कि उसके क्लिनिक के माध्यम से जन्मा बच्चा उनका जैविक बच्चा नहीं था, जब डीएनए परीक्षण के बाद यह पुष्टि हो गई कि बच्चा उनका जैविक बच्चा नहीं था, तो बच्चे का विदेशी पासपोर्ट अस्वीकार कर दिया गया था। जब्त सामग्री में अपराध की आय से उसके द्वारा अर्जित संपत्तियों के दस्तावेज भी शामिल हैं।
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