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पाटीदारों की 56 सीट ने गुजरात में मचाया राजनीतिक घमासान

Mon, 20 Nov 2017 02:56 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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पाटीदार - फोटो : File Photo
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भाजपा और कांग्रेस के बीच में पाटीदार समाज को लेकर राजनीतिक वर्चस्व की जंग शुरू हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में 56 सीटों पर पाटीदार समाज के उम्मीदवारों ने बाजी मारी थी। इसमें सबसे अधिक भाजपाई थे। ऐसे में इस बार दोनों राजनीतिक दल पाटीदार समाज को अपने पाले में करने के लिए राजनीतिक होड़ में हैं। भाजपा ने जहां अपने तरकश के सारे तीर छोड़ रखे हैं, वहीं कांग्रेस ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है।
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गुजरात में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान में उसके आईटी सेल के प्रभारी रोहन गुप्ता काफी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 2200 वालेंटियर के साथ देर से ही सही सोशल मीडिया कैंपेन में उतरने वाले रोहन ने भाजपा की भारी भरकम सोशल मीडिया टीम को जबरदस्त टक्कर दी है। 

रोहन का कहना है कि हमारे लिए तो सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि भाजपा के 22 साल के शासन के बाद भी पाटीदार समाज को आरक्षण की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में तो भाजपा के दावे पर जनता क्यों यकीन करें? रोहन गुप्ता का कहना है कि जिस रफ्तार से पाटीदार समाज कांग्रेस से जुड़ रहा है, उससे आने वाले समय में 40 प्रतिशत मतदाताओं के हमारे पाले में आने की उम्मीद है। इस आधार पर गारंटी के साथ कांग्रेस सरकार बना लेने की स्थिति में होगी।
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डॉ. अनिल जोशिआरा का कहना है कि नतीजे जमीन पर दिखने शुरू हो गए हैं। भाजपा नेताओं की इससे हवाइयां उड़ी हैं। इसे ध्यान में रखकर सत्ता पक्ष एक के बाद एक रणनीति अपना रही है, लेकिन मेरा मानना है कि अब भाजपा के लिए देर हो चुकी है। 

ये भी पढ़ेंः ऐतबार और अधिकार के बीच फंसा है पाटीदार-कांग्रेस का करार, डैमेज कंट्रोल में जुटी पार्टी

जोशिआरा के अनुसार भाजपा ने जहां अपनी 134 उम्मीदवारों की सूची में 26 से अधिक पटेल उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इसमें पहले और दूसरे दोनों चरण के उम्मीदवार शामिल हैं, वहीं कांग्रेस ने 77 उम्मीदवारों की सूची में 23 पाटीदारों को टिकट दिया है। इसका अच्छा नतीजा आएगा। इसके अलावा कांग्रेस ने अन्य जातियों को भी संतुलित किया है। कांग्रेस ने पाटीदार समाज की आवाज को तेज कर दिया है।

सपने देखने का हक सबकोः भाजपा
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस पाटीदार समाज को लेकर सपने देख रही है। सपने देखने का हक सबको है। 18 दिसंबर को नतीजे आने के बाद खुद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। 

सूत्र का कहना है कि अगले दो सप्ताह में सबको भाजपा का गुजरात दिखने लगेगा। पार्टी की आईटी सेल के एक अन्य सूत्र के अनुसार गुजरात विधानसभा चुनाव में पाटीदार समाज की 50 से अधिक सीटों में से 45 तो भाजपा के ही खाते में आएंगी। 

यह पूछे जाने पर पिछले विधानसभा चुनाव में करीब 52 विधायक पटेल थे, सूत्र का कहना है कि हम इस संख्या को पाने से इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन यदि दो-चार सीट कम हुई तो भी 45 सीटें मिलनी तय हैं। बताते हैं इसके लिए डोर-टू-डोर कैंपेन के साथ प्रचार अभियान को नई धार दी जा रही है।
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कांग्रेस को यहां लग रहा है डर

राहुल गांधी - फोटो : File Photo
कांग्रेस का डर भाजपा की नई रणनीति से है। कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने चुनाव में मुद्दे का रंग बदलना शुरू कर दिया है। वह अब  हिंदुत्व, बंटवारे की राजनीति और इमोशनल कार्ड पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। चुनाव को धार्मिक रंग दिया जा रहा है। 

पाटीदार समाज में बंटवारे तथा कांग्रेस की क्षत्रिय, आदिवासी, दलित और मुसलमान के समीकरण तथा सोच की याद दिलाकर चुनाव बाद उनकी (पटेल) ताकत घटने का एहसास कराने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान से जुड़े रणनीतिकार को लग रहा है कि जल्द भाजपा फिर गुजरात, गुजरात की अस्मिता, प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की दुहाई का कार्ड खेलेगी।

नहीं मिलेगा राजनीतिक दांव का फायदा
हालांकि भाजपा के नेता कांग्रेस पर जातिगत बंटवारे की राजनीति का आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन चुनाव प्रचार की भावी रणनीति पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। वहीं कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है कि उनके पास भाजपा के हर चुनाव प्रचार की काट है। रोहन गुप्ता का भी कहना है कि इस बार भाजपा मतदाताओं को नहीं बहका सकती। 

डा. अनिल जोशिआरा का भी कहना है कि अब बहुत देर हो चुकी है। चुनाव के समय में भाजपा को राजनीतिक दांव का फायदा नहीं मिलने वाला है। रोहन और अनिल दोनों का कहना है कि बड़े दिन बाद प्रधानमंत्री की सभाएं हो रही हैं और लोगों की भीड़ गायब है। जमीन पर उतरकर देखिए तो सब समझ में आ जाएगा।
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