गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को आसाराम को 20 दिन की अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। आसाराम ने अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रही अपनी 83 वर्षीय पत्नी से मिलने के लिए जमानत मांगी थी। जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरजादा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। आसाराम फिलहाल राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद है।
अदालत ने कहा कि अगर आसाराम अपनी पत्नी से बात करना चाहते हैं तो वह जेल अधीक्षक से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत की अनुमति देने का अनुरोध कर सकते हैं। आसाराम ने पत्नी की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर जमानत मांगी थी। उनकी पत्नी का अहमदाबाद के नरोदा स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। अदालत ने कहा कि डॉक्टरों और स्थानीय पुलिस की ओर से पेश रिपोर्ट के मुताबिक मरीज ने इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि उन्हें दो-तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, हमें फिलहाल जोधपुर जेल में बंद याचिकाकर्ता की अर्जी मंजूर करने का कोई कारण नहीं दिखता। हालांकि, अगर याचिकाकर्ता अपनी पत्नी से बात करना चाहता है, तो वह जेल अधीक्षक से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत की अनुमति देने का अनुरोध कर सकता है।
एक महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब हाईकोर्ट ने आसाराम को अंतरिम जमानत देने से इनकार किया है। आसाराम को 2013 के दुष्कर्म मामले में गांधीनगर की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ उसकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है। जनवरी 2023 में गांधीनगर की एक अदालत ने उसे एक महिला शिष्या से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
आसाराम राजस्थान के जोधपुर स्थित अपने आश्रम में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के एक अन्य मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने अपने आदेश में आसाराम को स्वास्थ्य बिगड़ने पर उससे संपर्क करने की अनुमति दी थी। साथ ही उसके लिए चौबीसों घंटे देखभाल करने वाले की व्यवस्था भी की थी। उसकी सजा पर रोक लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।