प्रवासी मजदूरों को बताया गुजरात का ब्रांड एंबेसडर
गुजरात के सूरत शहर को टेक्सटाइल इंडस्ट्री के बड़े केंद्र के तौर पर देखा जाता है। रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के श्रमिक यहां पर पहुंचते हैं और अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। इन श्रमिकों को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ये श्रमिक ही उनके गुजरात मॉडल के सफल ब्रांड एंबेसडर हैं। ये अपने साथ यहां की विकास की कहानियां अपने साथ ले जाते हैं और अपने गांव के लोगों को बताते हैं। इससे गुजरात मॉडल की चमक पूरे देश में पहुंचती है और वहां भी इसी तर्ज पर विकास होता है।
माताओं की चिंता दूर हो जाती है
संवेदनशील भाषणों से जनता का दिल जीतने के माहिर पीएम मोदी ने इसी ग्राउंड पर प्रवासी भारतीय श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा था कि जब वे अपने गांव से चलते हैं और सूरत पहुंचकर अपने घर फोन कर बताते हैं कि वे गुजरात पहुंच गए हैं, उनकी माताओं की चिंता दूर हो जाती है। क्योंकि उन्हें पता होता है कि यहां मोदी के रूप में उनका दूसरा बेटा मौजूद है, जो उनके बेटे की चिंता करता है। माना जाता है कि पीएम के इस संबोधन ने उत्तर प्रदेश-बिहार में उनके लिए बड़ा जनसमर्थन तैयार कर दिया था, जो 2014 और 2019 में भाजपा की प्रचंड जीत की आधारशिला बन गया।
क्या दोबारा जीतेंगे श्रमिकों का विश्वास
उत्तर भारतीय समाज से आने वाले गुजरात भाजपा के युवा नेता यजुवेंद्र दुबे ने अमर उजाला को बताया कि नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद यहां श्रमिकों की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने इस वर्ग की भलाई के लिए बहुत काम किया है और उन्हें राशन से लेकर मुफ्त आवास तक की सुविधा उपलब्ध कराई है। यही कारण है कि सूरत में भाजपा अजेय बन गई है। पीएम के सूरत आने पर सड़क के दोनों ओर हजारों लोगों की भीड़ खड़ी होकर जिस तरह उनका स्वागत कर रही है, वह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि उनकी लोकप्रियता अभी भी यहां चरम पर है। यजुवेंद्र दुबे ने कहा कि इस बार विधानसभा चुनाव में भी भाजपा यहां सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगी।