अरावली जिले की भिलोड़ा सीट से भाजपा के पीसी बरांडा जीते। उन्हें कांग्रेस के राजेंद्रकुमार पारघी और आम आदमी पार्टी के रूपसीभाई भगोरा से अच्छी टक्कर मिली। पूर्व आईपीएस अधिकारी पीसी बरांडा ने आम आदमी पार्टी के रूपसीभाई भगोरा को 8,768 वोटों से हरा दिया।
गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर सपा उम्मीदवार विजयी हुए तो बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
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अरावली जिले की भिलोड़ा सीट से भाजपा के पीसी बरांडा जीते। उन्हें कांग्रेस के राजेंद्रकुमार पारघी और आम आदमी पार्टी के रूपसीभाई भगोरा से अच्छी टक्कर मिली। पूर्व आईपीएस अधिकारी पीसी बरांडा ने आम आदमी पार्टी के रूपसीभाई भगोरा को 8,768 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार बरांडा को 90,396 वोट मिले। वहीं, आप के रूपसीभाई को 61,628 वोट मिले। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के राजेंद्रकुमार पारघी रहे। पारघी को 42,831 वोट मिले जो कुल वोट का 20.67 फीसद रहा। इसके अलावा चार उम्मीदवार ऐसे भी रहे जिनकी जमानत भी जब्त हो गई। नोटा को यहां 2,916 वोट मिले।
27 साल बाद जीती भाजपा
इस सीट पर भाजपा की यह दूसरी जीत है। इससे पहले भिलोड़ा सीट पर 1995 में भाजपा के टिकट पर अनिल जोशियारा ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद जोशियारा 2002 से 2017 तक लगातार चार बार कांग्रेस के टिकट पर जीते। 1998 में निर्दलीय उपेंद्र तिवारी यहां से विधायक बने थे। उपेंद्र तिवारी 1985 और 1990 में कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से जीते थे।
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2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत
भिलोड़ा विधानसभा सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से भाजपा ने पूर्व आईपीएस अधिकारी पीसी बरांडा को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्हें कांग्रेस के अनिल जोशियारा ने 12 हजार वोटों से हराया था। यहां इस कुल नौ उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी सात उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 2017
कौन हैं पूर्व आईपीएस बरांडा?
इस चुनाव में भाजपा की टिकट पर जीतने वाले पीसी बरांडा ने पिछले विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले राजनीति में आने की इच्छा जाहिर की थी। बरांडा को अमित शाह का करीबी माना जाता है। बरांडा ने चुनाव से कुछ समय पहले ही अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। जातिगत समीकरण में भी पीसी बरांडा भलोड़ा सीट से फिट बैठते हैं। इसे ध्यान में रखकर उन्हें दो बार लगातार टिकट दिया गया। बरांडा ने पिछले चुनाव में दावा किया था कि वह पार्टी से मिले इस सम्मान का कर्ज चुकाएंगे और भिलोड़ा सीट पर उनकी जीत पक्की है। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें हार झेलनी पड़ी थी।