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विधानसभा चुनाव 2022: गुजरात में किसे नुकसान पहुंचाएंगे केजरीवाल, त्रिकोणीय हुई लड़ाई तो किसे मिलेगा लाभ? 

अमित शर्मा
Updated Sun, 03 Apr 2022 06:14 PM IST

सार

आम आदमी पार्टी अब तक दो प्रदेशों, दिल्ली और पंजाब, में सफलता पाने में कामयाब रही है। इन दोनों ही राज्यों में उसने कांग्रेस की जमीन हथियाई है। जहां कांग्रेस अपेक्षाकृत कमजोर हुई, वहां उसने तेजी से अपनी जगह बनाई और सत्ता तक जा पहुंची। आम आदमी पार्टी के नेता गुजरात पहुंचने पर भी भाजपा से ज्यादा कांग्रेस पर हमले करते रहे। केजरीवाल लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि भाजपा को रोकने में कांग्रेस सक्षम नहीं है और इस पैमाने पर वे ज्यादा भरोसेमंद साबित हो सकते हैं।
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Arvind Kejriwal - फोटो : Amar Ujala


आम आदमी पार्टी अब तक दो प्रदेशों, दिल्ली और पंजाब, में सफलता पाने में कामयाब रही है। इन दोनों ही राज्यों में उसने कांग्रेस की जमीन हथियाई है। जहां कांग्रेस अपेक्षाकृत कमजोर हुई, वहां उसने तेजी से अपनी जगह बनाई और सत्ता तक जा पहुंची। आम आदमी पार्टी के नेता गुजरात पहुंचने पर भी भाजपा से ज्यादा कांग्रेस पर हमले करते रहे। केजरीवाल लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि भाजपा को रोकने में कांग्रेस सक्षम नहीं है और इस पैमाने पर वे ज्यादा भरोसेमंद साबित हो सकते हैं।


भाजपा को नुकसान की आशंका

परंपरागत तौर पर गुजरात में भाजपा शहरी क्षेत्रों में तो कांग्रेस ग्रामीण मतदाताओं में मजबूत रही है। ऐसे में यदि आम आदमी पार्टी शहरी क्षेत्रों में मजबूत होती है तो इससे भाजपा को नुकसान हो सकता है, जबकि उसके ग्रामीण इलाकों में पहुंचने पर कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। सूरत नगर निगम में आम आदमी पार्टी को मिली सफलता भी शहरी क्षेत्रों में ही गिनी जा सकती है। यह एक प्रमाण माना जा सकता है कि आम आदमी पार्टी शहरी इलाकों में लोकप्रिय हो सकती है।


राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार के अनुसार, गुजरात विधानसभा चुनाव इसी साल के अंत में हो सकते हैं। समय और संसाधन की सीमाओं को ध्यान में रखें तो गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के लिए पूरे गुजरात में आधार बनाना आसान काम नहीं होगा। वह इस सीमित समय में गुजरात के शहरी मतदाताओं तक ही पहुंचने में सफल हो सकती है। शहरी मतदाताओं तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान रहता है। इस तरह देखें तो इस बार आम आदमी पार्टी कांग्रेस की बजाय भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है।


कोई चेहरा नहीं

इसके बाद भी गुजरात में लड़ाई आम आदमी पार्टी के लिए आसान नहीं हो सकता है। इसका बड़ा कारण है कि अब तक आम आदमी पार्टी के पास गुजरात में ऐसा कोई नाम नहीं है जिसके चेहरे पर वो अपनी राजनीतिक लड़ाई को आगे बढ़ा सकें। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल एक बड़ा नाम थे। उन्हीं के नाम पर पूरा चुनाव लड़ा जाता है और उसे जीत हासिल हो जाती है। इसी प्रकार पंजाब में भी पार्टी के पास भगवंत मान के रूप में एक जाना-पहचाना नाम उपलब्ध था।


ध्यान रहे कि हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड में पूर्व कर्नल अजय कोठियाल को अपना चेहरा बनाया। इसी प्रकार उसने गोवा में अमित पालेकर पर दांव खेला। ये दोनों ही चेहरे अपने-अपने क्षेत्रों में बड़े नाम कहे जा सकते हैं, लेकिन इसके बाद भी वे आम आदमी पार्टी को कोई सफलता दिलाने में नाकाम रहे। इसका बड़ा कारण है कि दोनों ही उम्मीदवार राजनीतिक पृष्ठभूमि के नहीं थे।


राजनीतिक सफलताएं रातों-रात नहीं मिलतीं। पंजाब में 2014 के लोकसभा चुनाव से ही आम आदमी पार्टी की जमीन तैयार हो रही थी। पहले चुनाव में ही उसे राज्य में चार लोकसभा सीटें हासिल हो गई थीं जिसका लाभ 2022 में भगवंत मान के चेहरे को मिला। लेकिन केजरीवाल को वही सफलता उत्तराखंड या गोवा में हासिल नहीं हो सकी क्योंकि पार्टी अभी वहां खड़ी होने की कोशिश कर रही है।
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चेहरे की लड़ाई में भाजपा को टक्कर देना मुश्किल

धीरेंद्र कुमार के मुताबिक, यह आश्चर्यजनक लेकिन सत्य है कि वर्तमान दौर में भाजपा कोई भी चुनाव अपने स्थानीय नेता के नाम पर नहीं लड़ती है। वह केंद्र और विधानसभा चुनाव से लेकर नगर निगम के चुनाव तक में भी नरेंद्र मोदी का ही नाम भुना रही है। हाल ही में संपन्न पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने पीएम का नाम खूब भुनाया और तमाम सर्वेक्षण बताते हैं कि उसे इसका लाभ भी मिला। 


ऐसे में गुजरात विधानसभा चुनाव में भी भाजपा पीएम मोदी के चेहरे को ही भुनाएगी, यह तय है। वे यूपी चुनाव जीतने के बाद सीधे अहमदाबाद पहुंचकर रोड शो कर गुजरात को लेकर अपनी प्राथमिकता जाहिर कर चुके हैं। यह भी तय है कि वे गुजरात अस्मिता का मुद्दा अवश्य उठाएंगे। इस पैमाने पर उनके सामने आम आदमी पार्टी या कांग्रेस के लिए कोई चेहरा खोजना मुश्किल होगा। लिहाजा गुजरात की लड़ाई फिर एकतरफा हो सकती है।

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