विधानसभा स्पीकर को सौंपा इस्तीफा
विधायक को भूपत भयानी के नाम से भी जाना जाता है। एक अधिकारी ने बताया कि जूनागढ़ जिले की विसावदर सीट से विधायक भयानी ने गांधीनगर में सुबह गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी को अपना इस्तीफा सौंपा। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि वह एक विधायक के रूप में इस्तीफा दे रहे हैं। लेकिन उन्होंने इस फैसले के पीछे किसी कारण का जिक्र नहीं किया। गुजरात विधानसभा के सचिव डीएम पटेल ने कहा, 'विधानसभा अध्यक्ष ने भयानी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।'
विधानसभा चुनाव में आप ने जीती थीं पांच सीटें
भयानी पिछले साल के राज्य के विधानसभा चुनाव में चुने गए आम आदमी पार्टी (आप) के पांच विधायकों में से एक थे। 182-सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने 156 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह पहली बार था जब आप ने गुजरात में विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर जीत हासिल की।
'लोगों की सेवा के लिए आप सही मंच नहीं'
इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए भयानी ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी लोगों की सेवा करने का सही मंच नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं एक राष्ट्रवादी व्यक्ति हूं जो विकास और लोगों की सेवा में भरोसा करता हूं। आम आदमी पार्टी मेरे क्षेत्र के लोगों की सेवा करने के लिए सही मंच नहीं था। कोई भी राष्ट्रवादी आम आदमी पार्टी में लंबे समय तक नहीं रह सकता।'
'पीएम मोदी का विरोध करना पसंद नहीं था'
उन्होंने कहा, 'मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करना पसंद नहीं था, जो हमारे गौरव हैं और जिन्होंने दुनिया भर में भारत को गौरवान्वित किया है।' भयानी पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले आप में शामिल हुए थे। उससे पहले वह जूनागढ़ के भेसन गांव के सरपंच रहे। उन्होंने कहा, मैं जल्द ही भाजपा में शामिल हो जाऊंगा क्योंकि मैं मूल रूप से उसी पार्टी से जुड़ा हूं। विधायक बनने से पहले लगभग 22 वर्षों तक उसके लिए ही काम किया था। अगर केंद्रीय नेतृत्व चाहेगा तो मैं उपचुनाव लड़ूंगा। मुझ पर पद छोड़ने का कोई दबाव नहीं था (जैसा कि आप नेताओं ने दावा किया है)।
भयानी को प्रताड़ित किया गया: आप
गुजरात आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष इसुदन गढ़वी ने दावा किया कि भयानी को भाजपा ने प्रताड़ित किया और आप विधायक पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा,'भाजपा शुरू से ही आप को तोड़ने की कोशिश कर रही है। पिछले साल चुनाव के तुरंत बाद सत्तारूढ़ भाजपा ने भयानी से संपर्क किया था और उनसे पाला बदलने को कहा था। भाजपा ने दावा किया था कि आप के दो अन्य विधायक भी तैयार हैं और अगर पांच में से तीन विधायक पाला बदल लेते हैं तो दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा। जब भयानी ने इनकार कर दिया, तो उन्हें प्रताड़ित किया गया और इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।'