दिल्ली। मानसून सत्र में जीएसटी बिल का राज्यसभा से पारित होना लगभग तय माना जाने लगा है। केंद्र सरकार ने कांग्रेस के बगैर के विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी संख्या बल का इंतजाम कर लिया है लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सर्वसम्मति से बिल पास कराना चाहते हैं।
इस कारण कांग्रेस से सहयोग लेने की कोशिशें तेज हो गई हैं। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार की कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और आन्नद शर्मा से हुई बातचीत के बाद सरकार को कांग्रेस से सहयोग का भरोसा है।
सूत्रों का कहना है कि अनंत कुमार की कांग्रेस नेताओं से टेलीफोन पर बातचीत के बाद अब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात में गतिरोध समाप्त करने के फार्मूले पर बात होगी। कांग्रेस भी अब इस मुद्दे पर पहले की तरह सख्त रुख नहीं अपनाना चाहती।
कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद फैली हिंसा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आतंकवाद पर केंद्र के स्टैंड के अपरोक्ष समर्थन के बाद अब केंद्र ज्यादा आशान्वित है। लिहाजा बात बन जाने के आसार बढ़ गए हैं।
कांग्रेस के 60 सदस्य, भाजपा 54 पर अटकी
मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है। चूंकि जीएसटी बिल संविधान संशोधन से जुड़ा विधेयक हैं इसलिए इसे पारित कराने के लिए केंद्र सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरुरत होगी। इस तरह समर्थन में राज्यसभा में 163 वोट की जरुरत है। कांग्रेस अब भी सबसे बड़ा दल है।
कांग्रेस के 60 सदस्य हैं। भाजपा 54 पर अटकी है। इसके अलावा सपा के 19, एआईडीएमके के 12, बसपा के 6, जदयू के 10, बीजद के 8, शिव सेना के 3, अकाली दल के 3, पीडीपी के 2 और तेलगू देशम के 6 सदस्य भी बिल के पक्ष में बताए जाते हैं। मनोनीत सदस्य 10 हैं।
सीपीएम के 8 और सीपीआई के एक सदस्य का भी बिल को समर्थन मिलना लगभग तय है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के 5 सदस्य हैं। इस तरह केंद्र सरकार अंकगणित को अपने पक्ष में मानकर चल रही है। लेकिन पूरे देश में एक तरह की कर व्यवस्था के इस महत्वपूर्ण बिल में सरकार कांग्रेस का साथ जरूरी मान रही है।
एक प्रतिशत अतिरक्ति कर पर भी कांग्रेस को एतराज
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कांग्रेस बीस प्रतिशत अधिकतम कर की व्यवस्था को संविधान के संशोधन में शामिल कराना चाहती है जिस पर सरकार को एतराज रहा है। कांग्रेस इस स्टैंड से अब थोड़ा पीछे हटने के मूड में दिख रही है। अब इस व्यवस्था को संविधान संशोधन के बजाए संबंधित दस्तावेज में शामिल कर बीच का रास्ता निकाला जा सकता है।
एक प्रतिशत अतिरक्ति कर पर भी कांग्रेस को एतराज है। सरकार इसे वापस ले सकती है। इसके अलावा राजस्व संग्रह के विवादों वाली समिति को अधिक अधिकार देने की कांग्रेस की मांग पर भी बीच का रास्ता संभव है। सूत्रों की मानें तो सहमति का फार्मला लगभग तैयार है।