स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर होने का सरकार कुछ भी दावा करे लेकिन हकीकत कुछ और है। अभी दो दिन पहले बरेली में सरकारी एंबुलेंस के न जाने पर एक महिला का प्रसव सड़क पर ही कराना पड़ा था वहीं गुरुवार को एक महिला को न तो सरकारी एंबुलेंस मिली और न ही इलाज। एंबुलेंस चालक गर्भवती के घर गया लेकिन दो हजार रुपये न मिलने पर उसे नहीं ले आया। घरवाले निजी एंबुलेंस से लेकर सीएचसी पहुंचे तो वहां बिना कोई प्राथमिक उपचार दिए लखीमपुर खीरी जाने के लिए कह दिया।
सरकारी व्यवस्था से निराश घरवालों ने महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन बच्चे की कुछ देर बाद ही मौत हो गई। नाराज महिलाओं और ग्रामीणों ने सीएचसी पर हंगामा किया। वहां मौजूद डॉक्टर ने मामले की शिकायत लखनऊ में एंबुलेंस हेडक्वार्टर से करने की बात कहकर मामला शांत कराया।
गांव घनश्याम पुरवा निवासी प्रेम सागर ने बताया कि उसकी पत्नी सीमा गर्भवती थी। घर पर देखरेख न हो पाने से उसने सीमा को तिकुनियां क्षेत्र के गांव सूरतनगर स्थित मायके भेज दिया। बुधवार रात करीब नौ बजे सीमा की तबीयत खराब होने की सूचना मिली। वह ससुराल पहुंचा और हालत देखकर रात करीब 12 बजे 102 एंबुलेंस को फोन किया।