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निजी मेडिकल कॉलेज नहीं ले सकते प्रवेश परीक्षा: सुप्रीम कोर्ट

Fri, 06 May 2016 04:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रवेश परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : Reuters
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि यह सवाल ही पैदा नहीं होता कि एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों को अपनी परीक्षाएं लेने की इजाजत दी जाए। हालांकि शीर्ष अदालत ने सीबीएसई से पूछा है कि क्या एनईईटी-दो परीक्षा में उन छात्रों को भी शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है जो एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं।
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न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह स्पष्ट करने से इनकार किया कि राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं या नहीं। मालूम हो कि अदालत द्वारा सीबीएसई को नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट (एनईईटी) को दो चरणों में आयोजित करने की अनुमति देने केबाद राज्य सरकारों द्वारा एमबीबीएस और बीडीएस कोस के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। एनईईटी का पहला फेज एक मई को आयोजित हो गया जबकि दूसरा फेज 24 जुलाई को होगा।

पीठ ने कहा, हमने राज्यों के रेगुलेशन पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन एनईईटी प्रभावी है। वास्तव में अदालत ने तब यह टिप्पणी तब की जब वकील ने कहा कि ऐसा विचार बन गया है कि एमबीबीएस और डेंटल कोर्स के लिए राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं।
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सुनवाई केदौरान पीठ ने सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद से पूछा कि क्या जो छात्र एक मई को आयोजित एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं, क्या उन छात्रों को भी 24 जुलाई को होने वाली एनईईटी-दो परीक्षा शामिल होने की इजाजत मिल सकती है। पीठ ने यह भी पूछा कि क्या एनईईटी-दो में 30 लाख अभ्यर्थियों को शामिल किया जा सकता है।
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केन्द्र सरकार की ओर से ये था प्रस्ताव

वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वैसे छात्र जो किसी कारणवश एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, उन छात्रों को एनईईटी-दो परीक्षा में शामिल होने की इजाजत मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी छात्रों को एनईईटी-दो परीक्षा में शामिल होने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। जिस पर पीठ ने मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया(एमसीआई) ने इस बारे में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है क्या एनईईटी-दो परीक्षा में सभी छात्रों को शामिल किया जा सकता है।

सॉलिसिटर जनरल ने परीक्षा को विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने के राज्य सरकार की गुहार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अंग्रेजी भाषा में परीक्षा आयोजित करने का मकसद अंतरराष्टï्रीय मानक को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि एनईईटी महज एकल प्रवेश परीक्षा है। सीटों का बंटवारा और आरक्षण तो राज्य सरकार को ही तय करना है। एनईईटी परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर सफल हुए छात्रों में से राज्य खुद मेरिट लिस्ट बना सकता है।

वहीं जम्मू व कश्मीर राज्य की ओर से पेश वरिष्ठï वकील ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर को संविधान की धारा-370 के तहत विशेष दर्जा मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा समवर्ती सूची में है। ऐसे में किसी केंद्रीय कानून को राज्य में प्रभावी बनाने के लिए उसका राज्य विधानसभा में पारित होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कि राज्य को अपने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए अपनी परीक्षा आयोजित करने का अधिकार है। शुक्रवार को सुनवाई जारी रहेगी।
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