ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) सखियों ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए एनपीए को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार हर पंचायत में कम से कम एक एक सखी रखने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सखियां बैंकों और ग्रामीण आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई हैं। संस्थागत ऋण और अन्य बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच के साथ वह गांवों में लोगों की मदद के लिए घर-घर जाती हैं।
सरकार स्वयं सहायता समूहों के साथ दस करोड़ से ज्यादा महिलाओं को जोड़ने पर फोकस कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, अभी करीब 1,22,915 सखियां हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य देशभर की करीब ढाई लाख पंचायतों में प्रत्येक में कम से कम एक बैंक सखी नियुक्त करना है।
उन्होंने कहा,स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भारत में उद्यमिता के लिए राजदूत हो सकती हैं। जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी, तब स्वयं सहायता समूहों की एनपीए (गैर निष्पादित संपत्ति) 2014 में 9.59 फीसदी थी। अब यह घटकर 1.8 फीसदी हो गई है।
मंत्रालय के मुताबिक, 2013-14 से स्वंय सहायता समूहों द्वारा करीब 6.96 लाख करोड़ रुपये बैंक ऋण जमा किया गया है। मंत्री ने कहा कि संस्थागत वित्त तक पहुंच और ब्याज पर दी गई छूट ने इन स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं के लिए एक बड़ा अंतर पैदा किया है, जिसे उनके ऋण चुकाने की स्थिति में सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण (विजन) सतत आजीविका और महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास प्रदान करना है। हम बैंकिंग तक पहुंच को और आसान बनाने के लिए सभी पंचायतों में बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) सखियों और बैंक सखियों को रखने पर विचार कर रहे हैं।
स्वयं सहायता समूह की वह महिला जिसने कम से कम दसवीं कक्ष तक शिक्षा प्राप्त की है, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है और इन पदों पर तैनात किया है। बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखियों और बैंक सखियों में अंतर यह है कि बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखियां बैंकिंग तक पहुंच प्रदान करने के लिए गांव तक जाती हैं। जबकि, बैंक सखियां बैंक शाखाओं में तैनात हैं, ताकि लोगों को कागजी कार्रवाई और अन्य प्रक्रियाओं में मदद मिल सके।
अभी 56 हजार 764 ग्रामीण बैंक शाखाओं में 46 हजार 352 बैंक सखियां हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 42 हजार 667 बैंकिंग कॉरस्पॉडेंट सखियां हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश में 10 हजार 850 और राजस्थान में 10 हजार 559 हैं।