टीएमसी नेता का नोटों के बंडल के साथ वीडियो पर बवाल
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कई राज्यों में राज्यपालों के फेरबदल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि यह फेरबदल मोदी सरकार के संवैधानिक संघवाद के प्रति अनादर को दर्शाता है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राजभवनों को भाजपा के वॉर रूम में बदल दिया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार देर रात कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल बदल दिए। इस बड़े फेरबदल के तहत आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया गया है। उन्होंने सी.वी. आनंद बोस की जगह ली है। आनंद बोस ने गुरुवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि राज्यपालों की नियुक्ति में राज्य सरकारों को शामिल करना चाहिए। उन्होंने सरकारिया और पुंछी कमीशन की सिफारिशों का हवाला दिया। रॉय के मुताबिक, इन रिपोर्टों में साफ कहा गया है कि राज्यपाल चुनने के लिए एक पैनल बनना चाहिए। साथ ही संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से सलाह लेना जरूरी है। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लिए बिना पूछे नया राज्यपाल चुनना गलत है।
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से ठीक पहले आनंद बोस का इस्तीफा चर्चा का विषय बन गया है। बोस ने फोन पर बताया कि वह साढ़े तीन साल से बंगाल के राज्यपाल थे और अब उनके लिए इतना समय काफी है। हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में राजनीतिक फायदे के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने बोस पर दबाव डाला होगा।
आर.एन. रवि इससे पहले तमिलनाडु के राज्यपाल थे। वहां उनका मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सरकार के साथ अक्सर विवाद रहता था। अब रवि के बंगाल आने के बाद केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर तमिलनाडु का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे।
पुंछी कमीशन ने 2010 में सुझाव दिया था कि राज्यपाल की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री को भी शामिल करना चाहिए। वहीं, सरकारिया कमीशन ने भी मुख्यमंत्री से सलाह लेने की बात कही थी। टीएमसी का कहना है कि केंद्र सरकार इन सभी लोकतांत्रिक नियमों को ताक पर रख रही है। पार्टी ने साफ किया कि राज्यों के अधिकारों को नजरअंदाज करना संविधान का अपमान है।
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