डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही प्रोत्साहन योजना के बावजूद इसमें आ रही लगातार गिरावट को लेकर केंद्र सरकार चिंतित है। इस मसले पर 28 जुलाई को होने वाली बैठक में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद आगे की दिशा तय करेंगे। बैठक में एनपीसीआई, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सहित विभिन्न हिस्सेदार मौजूद रहेंगे। नोटबंदी के बाद सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए थे। इनमें पेट्रोलियम पदार्थों की खरीद पर छूट के साथ यूपीआई और भीम ऐप के जरिये भुगतान पर कैशबैक की व्यवस्था भी शामिल थी।
माना जा रहा है कि अप्रैल के बाद मई-जून में डिजिटल लेनदेन में और गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, आरबीआई की ओर से अब तक पिछले दो माह के आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री प्रसाद के नेतृत्व में होने वाली बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि संसद चल रही है और ऐसे में छूट व कैशबैक के बावजूद डिजिटल लेनदेन में गिरावट का सवाल उठ सकता है, जिस पर जवाब देना सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।
बैंक नहीं कर रहे सहयोग
आईटी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यूपीआई और भीम ऐप को बढ़ावा देने को लेकर बैंकों का रवैया सकारात्मक नहीं है। इसकी वजह यह है कि उनके सामने उलझन है कि वे अपने ऐप और कार्ड के लिए काम करें या फिर नि:शुल्क सेवा देने वाले सरकार द्वारा शुरू किए गए भीम ऐप का।
उन्होंने कहा कि सरकार को डिजिटल लेनदेन को दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए भी कई कदम उठाने चाहिए। अप्रैल में नकदी संकट का मसला भी सामने आया था, जिसकी वजह डिजिटल लेनदेन में कमी बताई गई थी। तब देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अध्ययन रिपोर्ट मेंएटीएम खाली होने की वजह 70,000 करोड़ रुपये नकदी की कमी बताई थी। इस दौरान डिजिटल लेनदेन में खासी कमी भी दर्ज की गई थी।
गौरतलब है कि जून में 160.81 करोड़ रुपये, मई में 151.65 करोड़ रुपये और अप्रैल में 149.81 करोड़ रुपये के डिजिटल लेनदेन हुए। इनमें शामिल चेक, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान में बढ़ोतरी हुई, जबकि अन्य माध्यमों में लगातार कमी आई, जिसे बढ़ाने के लिए नए कदम उठाए जाने की उम्मीद मंत्रालय के अधिकारियों ने जताई है।