दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट (डीआईएएल) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बलों (सीआईएसएफ) के बीच लंबे समय से भुगतान विवाद चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक डीआईएएल पर सीआईएसएफ का करीब 600 करोड़ बकाया है। कहा जा रहा है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इंदिरा गांधी एयरपोर्ट की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
मामले पर केंद्रीय गृह सचिव ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को खत लिखकर कहा है कि अगर भुगतान में तेजी नहीं आई तो गृह मंत्रालय के पास सुरक्षा वापस लेने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होगा। खत में यह भी कहा गया है कि सुरक्षा वापस लेने की शुरुआत कार्गो टर्मिनल से की जाएगी।
मामले पर सीआईएसएफ की तरफ से लगातार दावे किए जाते रहे हैं कि डीआईएएल उन्हें सारे पैसों का भुगतान करने की बजाय किश्तों में पैसे दे रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि वार्षिक सुरक्षा बिल के नाम पर उन्हें केवल 100 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया गया है।
वहीं एयरपोर्ट के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस समस्या के पीछे का कारण बढ़ती लागत है। उन्होंने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यात्रियों से सुरक्षा फीस 10 साल पहले तय हुई फीस के आधार पर ही ले रही है।
उन्होंने बताया कि जितने भी पैसे का कलेक्शन होता है वह एस्क्रू अकाउंट के जरिए आता है। जो कि सीएजी ऑडिट का विषय है। फिलहाल मामले को सुलझाने के लिए कंपनी सीआईएसएफ और नागरिक उड्डयन मंत्रालय से बातचीत कर रही है।