खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान
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भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकार 35 लाख रुपये तक का जीवन बीमा कवर उपलब्ध करायेगी। इस बात की जानकारी खुद खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने शुक्रवार को दी। दरअसल कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार की तरफ से 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है। ऐसे में यह बीमा 24 मार्च के बाद से बंद के दौरान ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों को उपलब्ध होगा।
देशभर में लागू लॉकडाउन के बाद से छह महीने के भीतर तक, अगर इनमें से किसी भी कर्मचारी या श्रमिक की ड्यूटी के दौरान कोरोना वायरस बीमारी से मौत होती है तो उन्हें 35 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर उपलब्ध होगा।
यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र की एफसीआई न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्नों की खरीद करने वाली शीर्ष केन्द्रीय एजेंसी है। एफसीआई किसानों से सीधे खाद्यान्न की खरीद करती है। इसके अलावा एफसीआई 81 करोड़ से अधिक राशन कार्डधारकों को सब्सिडी दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती है।
मौजूदा समय में बम विस्फोट, आतंकवादी हमले, भीड़ हिंसा या प्राकृतिक आपदा के दौरान अगर एफसीआई अधिकारियों की मौत हो जाती है, तो उनके परिजनों को मुआवजा देने का प्रावधान है। हालांकि, इस मुआवजे का फायदा नियमित और संविदा पर रखे गए श्रमिक को नहीं मिलता हैं।
पासवान ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के बीच एक लाख से अधिक एफसीआई अधिकारियों को जीवन बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। इसमें करीब 80,000 श्रमिक भी शामिल हैं।’’
श्रमिकों के लिए जीवन बीमा सुरक्षा
- नियमित श्रमिकों के लिए 15 लाख रुपये
- संविदा श्रमिकों के लिए 10 लाख रुपये
- एफसीआई अधिकारियों के लिए 25-35 लाख रुपये होगी।
अधिकारियों के लिए जीवन बीमा सुरक्षा
- पहली श्रेणी के अधिकारियों को 35 लाख रुपये तक
- दूसरी श्रेणी के अधिकारियों को 30 लाख रुपये तक
- तीसरी श्रेणी के अधिकारियों को 25-35 लाख रुपये तक
- चौथी श्रेणी के कर्मचारियों को 25-35 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रति व्यक्ति मिलेगा।