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यहां आजादी के 70 साल बाद पहुंची बिजली, जानें इससे पहले कैसा था यहां का हाल

Sun, 25 Mar 2018 04:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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देश को आजाद हुए तकरीबन 70 साल हो चुके हैं लेकिन फिर भी देश के कई भागों में बिजली नहीं पहुंच पाई है। अगर ये सवाल किया जाए एलीफेंटा टापू में बल्ब लगाने के लिए सरकार को कितना समय लगा? तो इसका जवाब होगा 70 साल। यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल कहे जाने वाले एलीफेंटा की गुफाओं में अब जाकर बिजली पहुंची है। गुरूवार को एक शीर्ष अधिकरी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक बिजली के लिए यहां जमीन में 7.5 किलोमीटर की लंबी केबल बिछाई गईं। यह टापू मुंबई से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

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उद्घाटन करने आए मुख्यमंत्री

यहां रहने वाले तकरीबन 1200 निवासियों ने आखिरकार उत्सवों जैसे कपड़े पहने जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस एमएसईडीसीएल पावर सप्लाई के उद्घाटन के लिए यहां पहुंचे। यहां के निवासियों का कहना है कि ब्रिटिश राज से पहले यहां बिजली थी लेकिन साल 1947 के बाद यहां बिजली नहीं थी। लोगों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने बिजली के लिए धन भी आवंटित किया लेकिन उसके बाद भी यहां बिजली नहीं पहुंची।

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ऐसे रहते हैं यहां के लोग

यहां रहने वाली एक महिला का कहना है कि यह बेशक एक पर्यटक स्थल है लेकिन यहां बहुत गरीबी है। पीने के लिए उसे बारिश का पानी इकट्ठा करना होता है जिसके लिए उसे तकरीबन 120 कदम की चढ़ाई करनी पड़ती है। महिला का कहना है कि न तो इस जगह स्कूल है और न ही डॉक्टर। मेडिकल इमरजेंसी के लिए यहां के लोगों को सफर करके कहीं और जाना पड़ता है।
 
यहां के लोगों का कहना है कि बच्चों को स्कूल के लिए मुंबई जाना पड़ता है और उन्हें पढ़ाई करने के लिए दिन में ही कहा जाता है। साथ ही यहां के लोग मोमबत्ती की रोशनी में खाना बनाते हैं या फिर चार्ज बैटरी का सहारा लेकर खाना बनाते हैं और फोन चार्ज करने जैसे अन्य काम भी करते हैं। यहीं रहने वाली एक अन्य महिला का कहना है कि बिजली, ठंडा पानी और पंखा महंगी चीजें हैं। पर्यटकों के लिए ठंडे पानी और कोल्ड ड्रिंक के लिए शहर से बर्फ मंगवानी पड़ती है और अगर एमआरपी से ज्यादा पैसा लिया जाए तो इन्हें बेईमान तक कह दिया जाता है। उनका कहना है कि यहां कोई पर्यटक रात को नहीं रुकता क्योंकि यहां कोई होटल नहीं है और न ही यहां अखबार, ब्रेड, ठंडा दूध और सब्जी मिलती है।  

इतने रुपये की आई लागत

महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी लिमिटेड के क्षेत्रीय निदेशक सतीश करापे का कहना है कि टापू पर रोजाना देशी और विदेशी प्रर्यटक आते हैं। टापू पर बिजली की परियोजना के लिए कुल 25 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह कार्य 15 महीनों में पूरा किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस केबल को बिछाने में तीन महीने का समय लगा है और यह समुद्र में बिछा भारत का सबसे लंबा बिजली केबल है। 

उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा तीन गांवों में स्ट्रीट लाइट टावर भी लगाए गए हैं। जिनमें प्रत्येक टावर की ऊंचाई 13 मीटर है। प्रत्येक गांव में ऐसे 6-6 टावर लगाए गए हैं। साथ ही इन टावरों में 6 शक्तिशाली एलईडी बल्ब भी लगाए गए। उन्होंने आगे कहा कि दो सौ घरों में बिजली मीटर के कनेक्शन लगाए गए हैं। इसके अलावा कुछ उपभोक्ताओं को व्यवसायिक कनेक्शन भी दिए गए। पिछले तीन दिनों की गहन जांच के अनुसार यह कार्य विद्युतीकरण का सफल कार्य रहा है।  
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