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CGHS: 45 लाख में से डेढ़ लाख लाभार्थियों ने ही आयुष्मान भारत खाते के साथ लिंक की अपनी आईडी, क्यों है असमंजस?

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 08 May 2024 01:09 PM IST

सार

स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत सीजीएचएस के कुल लाभार्थियों की संख्या 45,21,387 है। अभी तक डेढ़ लाख लाभार्थियों ने ही आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) संख्या नंबर सृजित कर उसे सीजीएचएस के साथ लिंक किया है। कुल 31,918 लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने पहले से ही आभा आईडी तैयार कर रखी थीं। उन्होंने अपनी आईडी को सीजीएचएस नंबर के साथ लिंक कर दिया है। 
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प्रतीकात्मक। - फोटो : अमर उजाला


एक दिन में हो रही इतनी आईडी लिंक

स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत सीजीएचएस के कुल लाभार्थियों की संख्या 45,21,387 है। अभी तक डेढ़ लाख लाभार्थियों ने ही आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) संख्या नंबर सृजित कर उसे सीजीएचएस के साथ लिंक किया है। कुल 31,918 लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने पहले से ही आभा आईडी तैयार कर रखी थीं। उन्होंने अपनी आईडी को सीजीएचएस नंबर के साथ लिंक कर दिया है। मंगलवार को 972 आभा आईडी बनाई गई हैं। उन्हें सीजीएचएस के साथ लिंक किया गया है। 235 ऐसे लाभार्थी हैं, जिनके पास पहले से ही आभा आईडी थी, उन्होंने भी सात मई को दोनों आईडी लिंक की हैं।


तीन माह के लिए बढ़ाई गई समय सीमा

गत माह ही दोनों आईडी को लिंक करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 22 अप्रैल तक 1,31,292 सीजीएचएस लाभार्थियों ने एबीएचए के साथ आईडी लिंक की थी। अब सात मई तक यह संख्या डेढ़ लाख तक पहुंची है। सरकार ने 'एबीएचए' बनाने की समय सीमा तय की है। यह समय सीमा 30 जून से तीन माह (90 दिन) के लिए बढ़ाई गई है। इसके साथ ही सीजीएचएस आईडी को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता से लिंक करने की समयावधि को आगे बढ़ाया गया है। इसमें 120 दिन का इजाफा किया गया है। 30 जून से 120 दिन के भीतर सीजीएचएस और एबीएचए को लिंक करना होगा।  


पहले तीस दिन का समय दिया गया था

केंद्र सरकार ने पहले सीजीएचएस और एबीएचए को आपस में लिंक करने के लिए लाभार्थियों को तीस दिन का समय दिया था। यह अवधि 30 अप्रैल को समाप्त होनी थी। इसके बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना महानिदेशालय ने 15 अप्रैल को एक नया कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' जारी किया था। इसमें 'एबीएचए' आईडी बनाने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। साथ ही, सीजीएचएस आईडी को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते से लिंक करने की समयावधि को भी बढ़ाया गया है।  


एबीएचए बनाने की समय सीमा बढ़ी

पहले सीजीएचएस लाभार्थियों की आईडी और एबीएचए को आपस में लिंक करने की प्रक्रिया पहली अप्रैल से शुरू करने की बात कही गई थी। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों से कहा गया था कि वे इस कार्य को तीस दिन में पूरा कर लें। कर्मियों ने जब इस आदेश पर सवाल उठाया, तो आभा आईडी बनाने की समय सीमा बढ़ा दी गई। यह समय सीमा 30 जून से तीन माह (90 दिन) के लिए बढ़ाई गई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) आईडी को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (एबीएचए) से लिंक करने की समयावधि भी बढ़ा दी है। इसमें 120 दिन का इजाफा किया गया है। यानी 30 जून से 120 दिन के भीतर सीजीएचएस और एबीएचए को लिंक करना होगा। इस कार्य में सीजीएचएस लाभार्थियों की मदद के लिए सभी वैलनेस सेंटरों पर कियोस्क स्थापित किए जा रहे हैं। ये कियोस्क 30 जून तक कार्य करना शुरू कर देंगे।


कोई बड़ा निर्णय ले सकती है सरकार

सीजीएचएस कार्ड को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट से 30 दिन के भीतर लिंक करना होगा, जब यह आदेश आया था, तो कर्मियों को ऐसी आशंका होने लगी कि केंद्र सरकार, देर-सवेर सीजीएचएस को लेकर कोई बड़ा निर्णय ले सकती है। यह आशंका जताई गई कि कर्मचारियों और पेंशनरों को सीजीएचएस से दूर किया जा सकता है। सरकारी कर्मियों के लिए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा खत्म हो सकती है। स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की स्टेंडिंग कमेटी के सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस बाबत पिछले दिनों 'स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय' के सचिव को पत्र लिखा है।


कर्मियों की सलाह लेना जरूरी नहीं समझा

श्रीकुमार ने अपने पत्र में लिखा, कर्मचारी संगठनों और जेसीएम ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का समर्थन नहीं किया है। बतौर श्रीकुमार, यह निर्णय हैरान करने वाला है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसा निर्णय लेने से पहले केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की स्टैंडिंग कमेटी की सलाह लेना भी जरूरी नहीं समझा। यह भारत सरकार का एक सोचा समझा कदम है। इसके जरिए सरकारी कर्मियों पर यह दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे केवल सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराएं। कर्मचारी, सीजीएचएस इम्पैनलमेंट अस्पतालों को अलविदा कह दें। कई कर्मचारी संगठन, अभी तक इन आदेशों को हजम नहीं कर पा रहे हैं।
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