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'परिसीमन जोड़ महिला आरक्षण टाल रही सरकार': सोनिया-राहुल के पत्र का जिक्रकर जयराम रमेश ने कहा- फिर देरी क्यों?

Tue, 21 Apr 2026 12:16 PM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर महिला आरक्षण लागू करने में देरी का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी पहले ही पत्र लिखकर इसे तुरंत लागू करने की मांग कर चुके थे, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन से जोड़कर टाल दिया।
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जयराम रमेश ने सरकार पर लगाए आरोप - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण लागू करने में देरी करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग कर चुके थे, लेकिन मोदी सरकार इस मुद्दे पर सोती रही और बाद में इसे परिसीमन से जोड़कर टालने की कोशिश की।

जयराम रमेश ने साझा किया सोनिया का पत्र

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि वर्ष 2017 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा से पारित कराने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोकसभा में बहुमत का उपयोग कर सरकार इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कराए।
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सोनिया गांधी ने अपने पत्र में लिखा था कि कांग्रेस पार्टी हमेशा इस कानून के समर्थन में रही है और आगे भी रहेगी, क्योंकि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम होगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया था कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की पहल सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस ने की थी, जो बाद में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के रूप में लागू हुई।

राहुल गांधी ने क्या मांग की थी?

वहीं रमेश ने राहुल गांधी का वह पुराना पत्र भी साझा किया, जिसमें उन्होंने संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री से सहयोग मांगा था। राहुल गांधी ने पत्र में लिखा था कि महिला आरक्षण बिल 9 मार्च 2010 को राज्यसभा से पारित हो चुका था, लेकिन उसके बाद लोकसभा में विभिन्न कारणों से अटका रहा।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से कहा था कि अगर सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गंभीर है, तो महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त समर्थन देकर संसद के आगामी सत्र में पारित कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि और देरी होने पर अगले आम चुनाव से पहले इसे लागू करना मुश्किल हो जाएगा।

भाजपा ने खतरनाक खेल खेलने की कोशिश- खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तमिलनाडु वेलाचेरी में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पराजित हुआ और संघीय ढांचे की जीत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर खतरनाक खेल खेलने की कोशिश की। खरगे ने कहा कि भाजपा सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन से महिला आरक्षण को जोड़ने का प्रयास किया, जिससे तमिलनाडु जैसे राज्यों को नुकसान होता, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है।

क्या है विपक्षी दलों की मांग?

विपक्षी दल ने मांग की कि केंद्र सरकार मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर ही महिला आरक्षण तुरंत लागू करे और इसके लिए संसद के मानसून सत्र या मई अंत तक नया विधेयक लाए।
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यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार का संविधान (131वां संशोधन) विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में गिर गया। इस बिल में महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था।

महिला आरक्षण विधेयक क्यों नहीं हुआ पास?

मतदान में 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 230 सांसदों ने विरोध में वोट दिया। कुल 528 मतों में से बिल पारित होने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे, जो सरकार को नहीं मिल सके।

प्रस्तावित विधेयक में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना थी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने हेतु सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था।
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