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Great Nicobar: 'सरकार आपदा को बढ़ावा देने पर तुली है', ग्रेट निकोबार परियोजना पर भड़के जयराम रमेश

Sun, 29 Sep 2024 11:38 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रमेश ने इस बात पर भी 'गंभीर चिंता' व्यक्त की कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा उसके समक्ष प्रस्तुत याचिकाओं पर सुनवाई के बावजूद भी सरकार परियोजना को लेकर अभिरुचि पत्र आमंत्रित कर रही है। 
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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का हो रहा विरोध - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखा है। इस पत्र में कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी पर पुनर्विचार करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की संरचना ही पक्षपातपूर्ण है और इससे परियोजना की सार्थक समीक्षा नहीं हो सकती। रमेश ने इस बात पर भी 'गंभीर चिंता' व्यक्त की कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा उसके समक्ष प्रस्तुत याचिकाओं पर सुनवाई के बावजूद भी सरकार परियोजना को लेकर अभिरुचि पत्र आमंत्रित कर रही है। 
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'भारत सरकार पारिस्थितिक और मानवीय आपदा थोपने पर आमादा'
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने पत्र में लिखा, 'मेरा मानना है कि भारत सरकार हमारे देश पर एक पारिस्थितिक और मानवीय आपदा थोपने पर आमादा है।' जयराम रमेश ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि 'सबसे पहले, मैं इस बात से हैरान हूं कि पर्यावरण और सीआरजेड मंजूरी की समीक्षा करने के लिए एनजीटी के निर्देश पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) में किसी भी स्वतंत्र संस्थान या विशेषज्ञ को शामिल नहीं किया, जबकि एनजीटी ने उसे ऐसा करने को कहा था। एचपीसी अपनी संरचना के कारण पक्षपाती है, उसने कोई सार्थक और व्यापक पुनर्मूल्यांकन नहीं किया है, जैसा कि उसे करने का निर्देश दिया गया था। एचपीसी की रिपोर्ट को गुप्त रखा गया है।' 

जयराम रमेश ने परियोजना को रणनीतिक घोषित करने पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि पर्यटन को बढ़ावा देने पर केंद्रित टाउनशिप, वाणिज्यिक ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट और बिजली संयंत्र को अचानक 'रणनीतिक परियोजनाओं' के रूप में कैसे घोषित किया जा सकता है, जिस पर कोई सार्वजनिक बहस नहीं हो सकती?' भूपेंद्र यादव को लिखे 10 पेज के पत्र में जयराम रमेश ने लिखा कि 'भले ही कोई परियोजना के सामरिक और रक्षा महत्व को स्वीकार कर ले, लेकिन यह द्वीप के आदिवासी समुदायों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर डालेगी। कोई भी 'रणनीतिक विचारों' के खिलाफ नहीं हो सकता है, लेकिन निश्चित रूप से उनके और पारिस्थितिक चिंताओं के बीच एक बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है और बनाया जाना चाहिए, जो इस मामले में निश्चित रूप से गायब है।'
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क्या है ग्रेट निकोबार परियोजना
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट की शुरुआत नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2021 में की थी। इस मेगा प्रोजेक्ट को अंडमान-निकोबार द्वीप समूहों के आखिरी छोर तक बनाया जाना है। इसके तहत मालवाहक जहाजों के लिए बंदरगाह, एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट, स्मार्ट सिटी और 450 मेगावॉट की गैस और सौर बिजली परियोजना को स्थापित किया जाएगा। केंद्र सरकार का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट 72,000 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। ग्रेट निकोबार द्वीप भारत की मुख्य जमीन से करीब 1,800 किलोमीटर दूर पूर्व में स्थित है। यह बंगाल की खाड़ी में 910 वर्ग किमी के हिस्से में बन रहा है। इस द्वीप पर इंदिरा पॉइंट भी है, जो इंडोनेशिया के सबसे बड़े द्वीप सुमात्रा से महज 170 किमी दूर है। हिंद महासागर में भारत के दबदबे के लिहाज से यह परियोजना बेहद अहम है। 
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