कितनों को मिल चुकी मदद
सेंट्रल टीबी डिवीजन के अधिकारी विकास शील के मुताबिक अब तक 1.5 लाख लोगों तक आर्थिक मदद पहुंचाई जा चुकी है। इसके अलावा 2 लाख मरीज ऐसे हैं जिन्हें रजिस्टर किया जा चुका है। सरकार की योजना है कि इस वर्ष के अंत तक 13 लाख लोगों को लाभ पहुंचा दिया जाएगा। दरअसल, भारत में टीबी के मरीजों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय है। आंकड़ों के रुप में लगभग 30 लाख लोगों को टीबी की बीमारी होती है।
इस मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि इतनी बड़ी संख्या में से लगभग 19 लाख लोगों को ही इलाज मिल पाता है। बाकी की बड़ी संख्या के केस अनरजिस्टर्ड ही रह जाते हैं। हालांकि सरकार को उम्मीद है कि वह जल्दी ही सभी रोगियों को रजिस्टर करने में और उनका इलाज करने में सक्षम हो जाएगी। प्राइवेट अस्पतालों से भी प्रतिवर्ष तीन लाख मरीज सामने आ रहे हैं जिसकी उम्मीद अगले वर्ष तक सात लाख तक हो जाने की उम्मीद है।
पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता टीबी
टीबी के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी को कभी पूर्ण रूप से खत्म नहीं किया जा सकता। पोलियो की बीमारी की तरह इसकी कोई वैक्सीन या इंजेक्शन नहीं आता जिसको लगा देने के बाद किसी व्यक्ति में पूरी जिंदगी टीबी की बीमारी न हो। दरअसल, टीबी की बीमारी किसी व्यक्ति के असुरक्षित निवास, सीलन भरी जगह में लगातार रहने, प्रदूषणयु्क्त वातावरण में रहने, टीबी से बीमार व्यक्ति के सीधे असुरक्षित संपर्क में आने और नशीले पदार्थों के सेवन के कारण उपजी कमजोरी की वजह से होता है। ये ऐसे कारण हैं जो हमेशा बने रह सकते हैं, इसलिए इस बीमारी का पूर्ण खात्मा कभी संभव नहीं है।
क्या है लक्ष्य
वैश्विक रुप से WHO ने जो लक्ष्य तय किया है, उसके मुताबिक टीबी मरीजों की कुल संख्या को 2030 तक 2015 के कुल मरीजों की संख्या के बीस फीसद तक ले आना है। इससे अलग हटकर भारत ने अपने लिए यह समय सीमा 2025 तक तय किया है।