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टीबी मरीजों को हर महीने 500 रुपये दे रही सरकार, बेहतर पोषण देकर 2025 तक बीमारी खत्म करने का लक्ष्य

Tue, 10 Jul 2018 10:21 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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टीबी की बीमारी से पूरी दुनिया में हर साल लगभग तेरह लाख लोगों की मौत हो जाती है। अकेले भारत में ही वर्ष 2016 में टीबी के कारण चार लाख बीस हजार लोगों की मौत हो गई। मौत के कारणों के आधार पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा लोगों की मौत का कारण बनने के मामले में टीबी नवें नंबर पर आता है। मामले की गंभीरता देखते हुए सरकार टीबी की बीमारी का उन्मूलन करना चाहती है। इसके लिए सरकार हर मरीज का समुचित इलाज सुनिश्चित करना चाहती है। 

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गरीब मरीजों का इलाज उचित पोषण के अभाव में बहुत कारगर नहीं रहता है। इसी कारण सरकार सभी टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान 500 रुपये प्रति माह की मदद उलब्ध करा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इससे टीबी के कारण होने वाली मौतों में कमी लाई जा सकेगी। 

किस तरह मिल रही है मदद

सरकार के द्वारा स्वास्थ्य के लिए जारी किए गए कुल बजट में 2800 करोड़ रुपये टीबी के लिए निर्धारित किया गया गया है। 'निक्षय पोषण योजना' के तहत टीबी के मरीजों को उचित खुराक उपलब्ध कराने के लिए 600 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस योजना के तहत हर टीबी पेशेंट को उसकी आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव किए बिना प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। 
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यह राशि सीधे मरीज के बैंक एकाउंट में ट्रांसफर की जा रही है। जैसे ही किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं, उन्हें एक टीबी पेशेंट के रुप में रजिस्टर कर लिया जाता है। पहली किस्त के रुप में उसे 1000 रुपये की मदद की जाती है। फिर उसके बाद बीमारी खत्म होने तक हर महीने आर्थिक मदद मिलती रहती है। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसी मरीज के पास आधार कार्ड होने की अनिवार्यता नहीं है।
 

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कितनों को मिल चुकी मदद

सेंट्रल टीबी डिवीजन के अधिकारी विकास शील के मुताबिक अब तक 1.5 लाख लोगों तक आर्थिक मदद पहुंचाई जा चुकी है। इसके अलावा 2 लाख मरीज ऐसे हैं जिन्हें रजिस्टर किया जा चुका है। सरकार की योजना है कि इस वर्ष के अंत तक 13 लाख लोगों को लाभ पहुंचा दिया जाएगा। दरअसल, भारत में टीबी के मरीजों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय है। आंकड़ों के रुप में लगभग 30 लाख लोगों को टीबी की बीमारी होती है। 

इस मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि इतनी बड़ी संख्या में से लगभग 19 लाख लोगों को ही इलाज मिल पाता है। बाकी की बड़ी संख्या के केस अनरजिस्टर्ड ही रह जाते हैं। हालांकि सरकार को उम्मीद है कि वह जल्दी ही सभी रोगियों को रजिस्टर करने में और उनका इलाज करने में सक्षम हो जाएगी। प्राइवेट अस्पतालों से भी प्रतिवर्ष तीन लाख मरीज सामने आ रहे हैं जिसकी उम्मीद अगले वर्ष तक सात लाख तक हो जाने की उम्मीद है।

पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता टीबी

टीबी के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी को कभी पूर्ण रूप से खत्म नहीं किया जा सकता। पोलियो की बीमारी की तरह इसकी कोई वैक्सीन या इंजेक्शन नहीं आता जिसको लगा देने के बाद किसी व्यक्ति में पूरी जिंदगी टीबी की बीमारी न हो। दरअसल, टीबी की बीमारी किसी व्यक्ति के असुरक्षित निवास, सीलन भरी जगह में लगातार रहने, प्रदूषणयु्क्त वातावरण में रहने, टीबी से बीमार व्यक्ति के सीधे असुरक्षित संपर्क में आने और नशीले पदार्थों के सेवन के कारण उपजी कमजोरी की वजह से होता है। ये ऐसे कारण हैं जो हमेशा बने रह सकते हैं, इसलिए इस बीमारी का पूर्ण खात्मा कभी संभव नहीं है। 

क्या है लक्ष्य

वैश्विक रुप से WHO ने जो लक्ष्य तय किया है, उसके मुताबिक टीबी मरीजों की कुल संख्या को 2030 तक 2015 के कुल मरीजों की संख्या के बीस फीसद तक ले आना है। इससे अलग हटकर भारत ने अपने लिए यह समय सीमा 2025 तक तय किया है। 
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