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मोदी की आजमगढ़ रैली से एमबीसी-दलितों को साधेगी भाजपा, दिखाएगी 'पॉवर-शो'

Tue, 10 Jul 2018 10:04 PM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूर्वाचंल एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास के बहाने प्रधानमंत्री मोदी आजमगढ़ रैली के जरिए ओबीसी, एमबीसी और दलितों को लुभाने की कोशिश करेंगे। मोदी ने इससे पहले संत कबीर नगर के मगहर में रैली करके डेढ़ करोड़ कबीर पंथियों तक पहुंच बनाने की कोशिश की थी। वहीं आजमगढ़ में प्रधानमंत्री शानदार रैली करके सपा-बसपा के गठबंधन को अपना 'पॉवर-शो' दिखाएंगे। 

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रैली में पहुंचेंगे 2 लाख लोग!

प्रधानमंत्री की 14 जुलाई को आजमगढ़ में होने वाली रैली का संयोजक भाजपा ने तेज तर्रार नेता व गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय महामंत्री सहजानंद राय को बनाया है। सहजानंद राय ने बताया कि प्रधानमंत्री की जनसभा ऐतिहासिक होगी और पार्टी की भी कोशिश है कि मुलायम के इस किले को ध्वस्त कर यहां भाजपा का झंडा बुलंद किया जाए। उन्होंने बताया कि इस रैली के लिए 9 हजार स्क्वॉयर फीट का पंडाल लगाया गया है। उम्मीद जताई कि रैली में 2 लाख से ज्यादा लोगों के पहुंचेंगे। 

किया 60-70 गांवों का चयन

सहजानंद के मुताबिक मंडल के तीनों जिलों आजमगढ़, बलिया और मऊ के अलावा प्रधानमंत्री की इस रैली में अंबेडकरनगर, गोरखपुर, देवरिया, गाजीपुर और जौनपुर की  विधानसभा के लोग भी पहुंचेंगे, जिसकी सीमाएं आजमगढ़ जनपद से लगती हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि रैली के 5 किलोमीटर के अंदर 60-70 गावों का चयन किया गया है, जहां से बड़ी संख्या में ग्रामीण रैली स्थल तक पहुंचेंगे।  
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10 हजार बाइकें और 500 बसें शामिल

इसके अलावा भाजपा की तरफ से लोगों को कार्यक्रम में ले जाने के लिए आजमगढ़ जिले में प्रत्येक बूथ पर एक छोटा वाहन मुहैया कराया जाएगा। इसके साथ ही रैली तक पहुंचने के लिए 10 हजार बाइकों और पांच सौ बसें भी लगाई गई हैं। इसके अलावा मऊ और बलिया जनपद को अतिरिक्त दो-दो सौ बसें मुहैया कराई गई हैं। 

9 जिलों से जुड़ेगा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे 

सहजानंद ने आजमगढ़ को रैली को चुनने के पीछे वजह बताई कि मुलायम के गढ़ आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे 9 जिलों से होकर गुजरेगा। आजमगढ़ के 90 किलोमीटर के इलाके से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे गुजरेगा। वहीं इलाहाबाद, अयोध्या और गोरखपुर भी इससे लिंक होंगे और करीब डेढ़ दर्जन लोकसभा सीटें इसकी जद में आएंगी। यह एक्सप्रेस वे पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों को सीधे यूपी की राजधानी लखनऊ से कनेक्ट करेगा। 

पिछड़ी जातियों पर नजर

अगर आजमगढ़ और उसके आसपास के इलाकों के जातीय समीकरण की बात करें, तो यूपी के ये इलाके काफी पिछड़े हुए हैं और यहां ओबीसी, एमबीसी और दलितों का बहुमत है। सपा-बसपा गठबंधन के बाद भाजपा खुद इन्हीं जातियों पर केन्द्रित कर रही है। भाजपा यहां के बाहुबली नेता को चुनावी अखाड़े में उतारकर दांव आजमा चुकी है और वह केवल एक बार सांसद बनाने में सफल भी रहे। रमाकांत के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए खुद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ से लोकसभा का पर्चा भरा और 2014 में भाजपा की आंधी चलने के बावजूद परचम लहराया। भाजपा यह सीट 65 हजार वोटों से हारी थी।   
 

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केवल एक लोकसभा और विधानसभा सीट भाजपा के पास

सहजानंद ने बताया कि आजमगढ़ की 10 विधानसभा सीटों में से केवल एक सीट भाजपा के अरुणकांत यादव के पास है, जो रमाकांत यादव के पुत्र हैं। सहजानंद ने बताया कि भाजपा बाकी सीटें केवल 6-7 हजार वोटों के अंतर से हारी, जबकि बसपा को 5 और सपा को 4 सीटें मिलीं। भाजपा आजमगढ़ से मोदी की रैली करके ओबीसी और दलितों को लुभाकर विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालना चाहती है। सूत्र बताते है कि मुलायम 2019 का लोकसभा चुनाव मैनपुरी से लड़ सकते हैं। 

आजमगढ़ में अगड़ों का कब्जा

सूत्रों ने बताया कि आजमगढ़, मऊ और बलिया में अगड़ों की संख्या मात्र 10 फीसदी है, जबकि 90 फीसदी आबादी पिछड़े वर्ग से आती है, जिनमें चौहान और राजभर बहुलता में हैं। लेकिन वहां कब्जा अगड़ी जातियों का है। जिले से दो एमएलसी विजय बहादुर पाठक और यशवंत सिंह राजपूत हैं। साथ ही पार्टी के जिलाध्यक्ष भी राजपूत है। पिछले 15-20 सालों से वहां जिला स्तर पर भी वहां अगड़ी जातियों का कब्जा है। सूत्र बताते हैं कि सपा-बसपा गठबंधन से निपटने और काउंटर रणनीति बनाने के लिए आज़मगढ़ सही जगह है। 

वहीं, प्रधानमंत्री की रैली भीड़ को वोट में बदलने में कितनी सक्षम होगी, अभी यह देखा जाना बाकी है। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री में लोगों का भरोसा बढ़ा है, उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री जिले के साथ न्याय करेंगे और पिछड़ी जातियों को प्राथमिकता देंगे। 
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