इजराइली साइबर सुरक्षा कंपनी ‘एनएसओ’ के 'पेगासस स्पाइवेयर' सॉफ्टवेयर पर जासूसी के आरोपों को लेकर लोकसभा सदस्य पिनाकी मिश्रा ने बीस सितंबर को सदन में यह सवाल पूछा था कि क्या 2019 में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को पेगासस स्पाइवेयर ने निशाना बनाया है, साथ ही उन्होंने यह सवाल भी किया था कि देश में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पिछले तीन वर्षों के दौरान मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के बारे में प्राप्त शिकायतों की संख्या कितनी है। इसके जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा है कि पेगासस स्पाइवेयर को लेकर मंत्रालय में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।
राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी के अनुसार, 2017-18 के दौरान 28 राज्यों और केंद्रशासित राज्य में मानवाधिकार रक्षकों के कथित उत्पीड़न के संबंध में एनएचआरसी द्वारा प्राप्त शिकायतों की संख्या 73 रही है। 2018-19 में 89 शिकायतें, 2019-20 में 105 और 2020-21 में 31 अगस्त तक 39 शिकायतें मिली हैं। एनएचआरसी के पास मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के बारे में शिकायतें प्राप्त करने और उनकी जांच करने के लिए एक समर्पित फोकल प्वाइंट है। शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई होती है। इन्हें मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ साथ उनकी शिकायतों के निवारण के लिए राज्य सरकार के संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष उठाया जाता है।
पेगासस स्पाइवेयर ने कई देशों में मचा दिया था हड़कंप
पेगासस स्पाइवेयर के बारे में कहा जाता है कि गत वर्ष लगभग बीस देशों में व्हाट्सअप यूजर्स की गोपनीयता एवं निजी सूचनाओं की जासूसी करने के लिए स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया था। भारत में भी कथित तौर पर कुछ ऐसी जानकारियां सामने आई थीं, जिनमें इस स्पाइवेयर द्वारा मीडिया से जुड़े लोगों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया।
व्हाट्सअप ने पेगासस स्पाइवेयर को तैयार करने वाली कंपनी एनएसओ ग्रुप पर अमेरिका के संघीय न्यायालय में मुकदमा भी दायर किया है। दुनिया के कई देशों में यह स्पाइवेयर करीब 1400 मोबाइल उपकरणों पर भेजा गया था। इनमें सौ से अधिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, मीडिया कर्मी और सिविल सोसायटी के सदस्य शामिल हैं।
पेगासस स्पाइवेयर एक ऐसा प्रोग्राम है, जो उपयोग करने वाले व्यक्ति के मोबाइल फोन और कंप्यूटर से गोपनीय जानकारी चुरा लेता है। इस तरह की जासूसी के लिए पेगासस ऑपरेटर एक खास तरह का लिंक उपयोगकर्ताओं के पास भेजता है। क्लिक करने पर सॉफ्टवेयर उपयोगकर्ता की स्वीकृति के बिना ही इंस्टॉल हो जाता है। इसके बाद पेगासस स्पाइवेयर का एक नया वर्जन भी तैयार कर दिया गया। इसमें उपयोगकर्ता के पास लिंक भेजने की भी जरूरत नहीं है। बल्कि एक मिस्ड कॉल से सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल हो जाता है।
इंस्टॉलेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेगासस ऑपरेटर को फोन से जुड़ी तमाम जानकारी प्राप्त हो जाती हैं। पेगासस इतना पावरफुल सॉफ्टवेयर है कि वह पासवर्ड से सुरक्षित की गई फाइल को आसानी से तोड़ सकता है। मोबाइल फोन में मौजूद सभी सूचनाएं, जिनमें व्हाट्सअप और टेलीग्राम जैसे कम्युनिकेशन एप की फाइलें भी पेगासस ऑपरेटर को भेज सकता है।
खास बात है कि पेगासस सॉफ्टवेयर उपकरण की मेमोरी का पांच फीसदी से भी कम इस्तेमाल करता है। इससे उपयोगकर्ता को इसके होने का आभास भी नहीं होता। इस सॉफ्टवेयर के बारे में यह भी कहा जाता है कि ये ब्लैकबेरी, एंड्रायड, आईओएस और सिंबियन आधारित उपकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। इस सॉफ्टवेयर की पहली रिपोर्ट 2016 में सामने आई थी, जब संयुक्त अरब अमीरात में एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को उनके मोबाइल पर एक एसएमएस लिंक के साथ निशाना बनाया गया।